NEET UG 2026 Paper Leak: देश की सबसे प्रतिष्ठित और बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 एक बार फिर भ्रष्टाचार, धांधली और पेपर लीक के दलदल में डूब चुकी है। 3 मई को आयोजित हुई परीक्षा को भारी फजीहत और चौतरफा दबाव के बाद नेशनल Testing Agency (NTA) ने रद्द तो कर दिया, लेकिन इस फैसले ने केंद्र सरकार के ‘शून्य त्रुटि’ (Zero Error) और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली के दावों को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। 22.79 लाख से अधिक होनहार छात्रों का भविष्य आज अधर में है, और इस महा-घोटाले ने सीधे तौर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और सत्तासीन भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
व्हाट्सएप ग्रुप्स, कोचिंग माफियाओं और सांठगांठ के इस खेल ने साबित कर दिया है कि देश का परीक्षा तंत्र पूरी तरह खोखला हो चुका है।
‘प्राइवेट माफिया’ का राज, सरकार का खुफिया तंत्र फेल
जांच में यह साफ हो चुका है कि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्रों की खुलेआम सौदेबाजी हो रही थी। व्हाट्सएप पर “Private Mafia” जैसे ग्रुप बनाकर ₹5,000 से लेकर ₹30,000 तक में एंट्री दी जा रही थी और परीक्षा के चंद घंटे पहले पासवर्ड प्रोटेक्टेड पीडीएफ (PDF) फाइलें बांटी गईं।
-
करोड़ों का खेल: एक-एक छात्र से 10 लाख से लेकर 30 लाख रुपये तक वसूले गए।
-
सबसे बड़ा सवाल: जब देश में इतनी बड़ी परीक्षा का आयोजन हो रहा था, तो सरकार की खुफिया एजेंसियां और साइबर सेल क्या कर रहे थे? कैसे एक सिंडिकेट इतनी आसानी से परीक्षा की शुचिता को भंग कर गया?
यह भीं पढ़े: माफिया Vijay Mishra को उम्रकैद, 46 साल पुराने प्रयागराज कचहरी मर्डर केस में कोर्ट का बड़ा फैसला
कोचिंग हब और बिचौलियों का गठजोड़: व्यवस्था पर तमाचा
राजस्थान का प्रमुख कोचिंग हब ‘सीकर’ इस घोटाले का सबसे बड़ा अड्डा बनकर उभरा है। यहां हॉस्टल संचालकों, काउंसलर्स और कोचिंग सेंटर्स ने मिलकर एक ‘गेस पेपर’ तैयार किया, जिसमें 410 सवालों के बीच 120 असली सवाल हूबहू छिपा दिए गए थे। यह साफ तौर पर दर्शाता है कि बिना प्रशासनिक और राजनीतिक रसूख के इतना बड़ा सिक्योरिटी ब्रीच (Security Breach) मुमकिन ही नहीं है। महाराष्ट्र से लेकर राजस्थान और हरियाणा तक फैले इस नेटवर्क ने सरकारी दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं।
शिक्षा मंत्री और NTA पर चौतरफा हमला: इस्तीफे की मांग तेज
इस महा-घोटाले के सामने आने के बाद विपक्ष और छात्र संगठनों ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
-
धर्मेंद्र प्रधान का घेराव: कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर देशव्यापी प्रदर्शन शुरू कर दिया है। विपक्ष का आरोप है कि शिक्षा मंत्रालय बार-बार युवाओं के भविष्य की बलि चढ़ा रहा है।
-
नेताओं से कनेक्शन के आरोप: राजस्थान और अन्य राज्यों में पकड़े गए मुख्य आरोपियों के तार सत्ताधारी दल के नेताओं से जुड़े होने के गंभीर आरोप विपक्षी दलों द्वारा लगाए जा रहे हैं, जिसने इस पूरे मामले को अत्यधिक संवेदनशील बना दिया है।
-
नीट को खत्म करने की मांग: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री समेत कई क्षेत्रीय नेताओं ने इस लीक को राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली की ‘संरचनात्मक विफलता’ (Structural Flaw) करार दिया है और नीट परीक्षा को पूरी तरह से खत्म (Scrap) करने की मांग को फिर से हवा दे दी है।
सुप्रीम कोर्ट में घिसटती साख
डॉक्टरों के सबसे बड़े संगठन ‘फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन’ (FAIMA) ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में साफ कहा गया है कि NTA जैसी संस्थाओं पर से अब भरोसा उठ चुका है, इसलिए अदालत की निगरानी में इस घोटाले की जांच होनी चाहिए और NTA को बदलकर एक तकनीकी रूप से उन्नत स्वायत्त संस्था का गठन किया जाना चाहिए।
केंद्र सरकार ने डैमेज कंट्रोल के लिए जांच सीबीआई (CBI) को सौंप दी है और री-टेस्ट का एलान कर दिया है, लेकिन सवाल वही है— बार-बार होने वाली इन परीक्षाओं की तैयारी में जो मानसिक प्रताड़ना, पैसा और समय छात्र गंवाते हैं, उसकी भरपाई कौन करेगा? क्या सिर्फ परीक्षा रद्द कर देना ही सरकार की जिम्मेदारी की इतिश्री है?
