प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के जघन्य मुकदमों में न्याय की एक बड़ी नजीर सामने आई है। प्रयागराज की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने लगभग साढ़े चार दशक पुराने सनसनीखेज हत्याकांड में भदोही की ज्ञानपुर सीट से चार बार के पूर्व विधायक और माफिया विजय मिश्र को उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई है। अदालत ने इस मामले में विजय मिश्र समेत चार आरोपियों को दोषी पाते हुए उन पर एक-एक लाख रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है।
कचहरी परिसर में सरेआम हुआ था खूनी खेल
यह पूरा मामला साल 1980 का है, जिसने तब के इलाहाबाद (अब प्रयागराज) को दहला दिया था।
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तारीख और घटना: 11 फरवरी 1980 को विश्वविद्यालय के छात्र प्रकाश नारायण पांडे एक मामले में अपनी जमानत के सिलसिले में जिला कचहरी आए थे।
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अंधाधुंध फायरिंग: जब प्रकाश कचहरी परिसर में स्थित एक होटल के पास अपने वकील की सीट पर बैठे थे, तभी विजय मिश्र अपने साथियों के साथ राइफल और बंदूकें लेकर वहां धमक पड़े। पुरानी दुश्मनी के चलते सरेआम गोलियां बरसाकर प्रकाश नारायण की हत्या कर दी गई।
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मुकदमा: घटना के बाद मृतक के बड़े भाई श्याम नारायण पांडे ने कर्नलगंज थाने में विजय मिश्र, जीत नारायण, संतराम और बलराम के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराई थी।
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साजिश के तहत गायब कर दिए गए थे केस के दस्तावेज
इस मामले में इंसाफ मिलने में 46 साल का लंबा वक्त इसलिए लगा क्योंकि रसूख के दम पर कानूनी प्रक्रिया को भटकाने की पूरी कोशिश की गई थी।
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केस डायरी गायब: ट्रायल के दौरान अदालत से इस पूरे केस की मूल केस डायरी और महत्वपूर्ण दस्तावेज रहस्यमय तरीके से गायब हो गए, जिससे सुनवाई दशकों तक थमी रही।
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फाइल का पुनर्गठन: हार न मानते हुए बाद में पूरी केस फाइल को दोबारा री-कंस्ट्रक्ट (पुनर्गठित) किया गया और नए सिरे से गवाहियां शुरू हुईं।
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वैज्ञानिक साक्ष्य: चश्मदीदों के अटूट बयानों और पुलिस द्वारा घटना के समय मौके से बरामद किए गए असलहों की फॉरेंसिक रिपोर्ट ने विजय मिश्र की जेल की राह तय की।
77 मुकदमों के इतिहास का हुआ अंत
विजय मिश्र का पूर्वांचल की राजनीति और अपराध जगत में एक समय बड़ा दखल था। उनके खिलाफ हत्या, रंगदारी, लूट, अपहरण और गैंगस्टर एक्ट के 77 से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं। फिलहाल वह आगरा जेल में बंद हैं और कोर्ट ने उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस पूरी अदालती कार्यवाही में पेश किया था। कई मुकदमों में बरी होने वाले विजय मिश्र को इस ऐतिहासिक फैसले ने पूरी तरह सलाखों के पीछे भेज दिया है।
अदालत का कड़ा संदेश: कानून से ऊपर कोई नहीं
विशेष कोर्ट के न्यायाधीश योगेश कुमार ने सजा सुनाते हुए साफ किया कि कचहरी जैसे सुरक्षित स्थान पर सरेआम कत्ल करने वालों के प्रति कोई भी नरमी नहीं बरती जा सकती। इस फैसले ने साफ कर दिया है कि अपराधी चाहे कितना भी रसूखदार हो और गुनाह कितना भी पुराना, कानून की नजरों से बच पाना नामुमकिन है।
