नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आपदा के समय देश की ढाल बनने वाली ‘नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स’ (NDRF) को उसकी दो दशकों की उत्कृष्ट सेवा के लिए सर्वोच्च राजकीय सम्मान ‘प्रेसिडेंट्स कलर’ प्रदान किया। इस ऐतिहासिक मौके पर गृह मंत्री ने कहा कि एनडीआरएफ ने अपनी निस्वार्थ सेवा से साबित कर दिया है कि वह केवल एक बचाव दल नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की अटूट उम्मीद का नाम है।
शून्य जनहानि (Zero Casualty) की ओर बढ़ता भारत
विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने भविष्य की चुनौतियों और सरकार के विजन पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप, भारत अब आपदा प्रबंधन में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है।
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बड़ा लक्ष्य: सरकार का अगला उद्देश्य ‘जीरो कैजुअल्टी’ यानी आपदा के समय एक भी जान न जाने देने का है।
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आधुनिक तैयारी: गृह मंत्रालय अब हीटवेव, बाढ़ और चक्रवात जैसी चुनौतियों के लिए पहले से कहीं अधिक आधुनिक रिस्पॉन्स सिस्टम तैयार कर रहा है।
20 सालों का साहस और ‘निशान’ की गरिमा
एनडीआरएफ को मिले इस सम्मान, जिसे ‘निशान’ भी कहा जाता है, की महत्ता बताते हुए शाह ने कहा कि यह किसी भी सैन्य या अर्धसैनिक बल के लिए गौरव का शिखर है।
“पिछले 20 वर्षों में एनडीआरएफ के जवानों ने अपनी जान जोखिम में डालकर हजारों जिंदगियां बचाई हैं। यह सम्मान उनके उसी शौर्य, पराक्रम और समर्पण का परिणाम है।”
जब वर्दी बनती है ‘सुरक्षा की गारंटी’
गृह मंत्री ने बल की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज देश के किसी भी कोने में जब आपदा आती है और एनडीआरएफ की वर्दी में जवान वहां पहुंचते हैं, तो लोगों के मन से डर खत्म हो जाता है। उन्होंने कहा कि महज 20 साल के सफर में इस बल ने न केवल इंसानों बल्कि बेजुबान जानवरों को भी रेस्क्यू कर अपनी मानवीय छवि को मजबूत किया है।
क्या होता है ‘प्रेसिडेंट्स कलर’?
यह सम्मान राष्ट्र की रक्षा और सेवा में असाधारण योगदान देने वाली यूनिट को राष्ट्रपति की ओर से दिया जाता है। इस प्रतिष्ठित अवार्ड को पाने के बाद बल के सभी अधिकारी और जवान अपनी वर्दी की बाईं आस्तीन पर गर्व के साथ इसका विशेष प्रतीक चिन्ह (Emblem) पहनते हैं, जो उनकी विशिष्टता और वीरता को दर्शाता है।
