वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे शहर के तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर के बेहद करीब पहुंच चुका है, जबकि खतरे का निशान 71.262 मीटर है। मंगलवार सुबह 8 बजे जलस्तर 68.94 मीटर दर्ज किया गया, जो प्रति घंटे 4-5 सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ रहा है। भारी बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों से आ रहे पानी के कारण गंगा और उसकी सहायक नदी वरुणा में उफान है। वरुणा में पलट प्रवाह के चलते सरैया, कोनिया, नक्खीघाट, सलारपुर और चिरईगांव जैसे इलाकों में बाढ़ का पानी घरों में घुस गया है, जिससे हजारों लोग प्रभावित हुए।
स्थानीय निवासियों में दहशत का माहौल है, और कई परिवार अपने घर छोड़कर राहत शिविरों या रिश्तेदारों के पास पलायन कर रहे हैं। जिला प्रशासन ने 46 बाढ़ राहत शिविर स्थापित किए हैं, जहां 150 से अधिक परिवारों ने शरण ली है। एनडीआरएफ और जल पुलिस मोटरबोटों के साथ राहत और बचाव कार्य में जुटी है। नाव संचालन पर रोक लगा दी गई है, और दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती अब छतों पर आयोजित की जा रही है। सभी 84 घाट जलमग्न हो चुके हैं, और नमो घाट पर बना नमस्ते का विशाल शिल्प भी आधा डूब गया है।
प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और गंगा किनारे न जाने की अपील की है। हेल्पलाइन नंबर 0542-2508550 और 0542-2504170 जारी किए गए हैं। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में और बारिश की चेतावनी दी है, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है। जिलाधिकारी एस. राजलिंगम ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत कार्यों की समीक्षा की और अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में बिजली और संचार सेवाओं को बनाए रखने के प्रयास जारी हैं

