लखनऊ। यूपी “रेरा” के तहत गठित एनसीएलटी (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) मामलों की कमेटी में ईमानदार अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी के बेटे जयश भूसरेड्डी को सदस्य बनाये जाने यर सभी हैरान हैं। रियल एस्टेट की डिफॉल्टर घोषित करीब 200 परियोजनाओं से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाले नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के आदेशों का अध्ययन करने के लिए उप्र भू संपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) द्वारा गठित कमेटी में रेरा के ईमानदार अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी के बेटे जयश भूसरेड्डी को सदस्य के रूप में शामिल करने पर सवाल उठ रहे हैं।
संजय भूसरेड्डी वह आईएएस अफसर हैं, जिन्होंने आबकारी विभाग में तैनाती के दौरान दावा किया था कि यूपी में आबकारी का वार्षिक राजस्व सपा सरकार में जो 17-18 हजार करोड़ रूपये था, उसे बढ़ाकर उन्होंने 45 हजार करोड़ रूपये वार्षिक करा दिया था। श्री भूसरेड्डी के इस दावे के बाद सरकार ने उनकी ईमानदारी के बदले रेरा के अध्यक्ष जैसे अति महत्वपूर्ण व प्रतिष्ठित पद का अध्यक्ष बनाया था। इसके यहले इस प्रतिष्ठित पद पर यूपी के पूर्व चीफ सेक्रेटरी राजीव कुमार तैनात थे। लेकिन संजय भूसरेड्डी के बेटे से जुड़ा ताजा मामला सामने आने के बाद उनकी कथित ईमानदारी से लोग हैरान हैं। हालांकि, मामला खुलने पर श्री भूसरेड्डी के नजदीकी इस आदेश को एक हफ्ते में ही रद्द करने का दावा कर रहे हैं। यूपी की रियल एस्टेट की डिफॉल्टर 196 कंपनियों के मामले एनसीएलटी में विचाराधीन हैं। इनमें लखनऊ व एनसीआर समेत कई शहरों में काम कर रहीं बड़ी कंपनियां भी शामिल हैं। इनके प्रकरण का अध्ययन करने व उनका पक्ष एनसीटीएल में रखने के लिए पिछले दिनों यूपी रेरा ने एक कमेटी बनाई थी। जिसको लेकर यूपी की ब्यूरोक्रेसी में न केवल चर्चा है, बल्कि सभी हैरान हैं।

