नई दिल्ली/बेंगलुरु: ग्लोबल आईटी सेक्टर से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने भारतीय टेक प्रोफेशनल्स की नींद उड़ा दी है। दिग्गज अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी ओरेकल (Oracle) ने वैश्विक स्तर पर बड़े पैमाने पर छंटनी (Layoff) का ऐलान किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने एक साथ करीब 30,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस छंटनी की सबसे गाज भारतीय कर्मचारियों पर गिरी है, जिनकी संख्या कुल छंटनी का 40 फीसदी से भी अधिक बताई जा रही है।
भारत में 12,000 से ज्यादा कर्मचारियों की छुट्टी
भारत, जो ओरेकल के लिए एक बड़ा हब माना जाता है, वहां इस फैसले का सबसे गहरा असर देखने को मिल रहा है। जानकारी के अनुसार, अकेले भारत में लगभग 12,000 कर्मचारियों को पिंक स्लिप थमा दी गई है। भारत में ओरेकल के कुल वर्कफोर्स की संख्या लगभग 30,000 है, जिसका मतलब है कि कंपनी ने अपने भारतीय ऑपरेशन्स के एक बड़े हिस्से में कटौती की है। सूत्रों का तो यह भी कहना है कि अगले एक महीने के भीतर छंटनी का एक और बड़ा दौर आ सकता है, जिससे कर्मचारियों में डर का माहौल है।
आखिर क्यों लिया कंपनी ने इतना बड़ा फैसला?
ओरेकल की ओर से कर्मचारियों को भेजे गए आधिकारिक ईमेल में इस छंटनी को ‘संगठनात्मक बदलाव’ (Organizational Changes) का नाम दिया गया है। कंपनी का कहना है कि वह अपने ग्लोबल ऑपरेशन्स को सरल और अधिक प्रभावी बनाना चाहती है। इसी प्रक्रिया के तहत कई पदों को पूरी तरह समाप्त किया जा रहा है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि एआई (AI) के बढ़ते दखल और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच कंपनियां अपनी लागत घटाने के लिए ऐसे कड़े कदम उठा रही हैं।
क्या है सेवरेंस पैकेज? किसे क्या मिलेगा?
नौकरी गंवाने वाले कर्मचारियों के लिए कंपनी ने एक सेवरेंस पैकेज (Severance Package) की घोषणा की है, लेकिन इसकी शर्तें काफी चर्चा में हैं:
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अनुभव के आधार पर भुगतान: जिन कर्मचारियों ने कंपनी में कम से कम एक साल की सेवा पूरी कर ली है, उन्हें 15 दिनों की अतिरिक्त सैलरी दी जाएगी।
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अन्य लाभ: टर्मिनेशन डेट तक की पूरी सैलरी, लीव इनकैशमेंट, और नियमों के अनुसार ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाएगा।
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नोटिस पीरियड: एक महीने के नोटिस पीरियड की सैलरी भी कर्मचारियों को मिलेगी।
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विशेष प्रस्ताव: कंपनी ने दो महीने की अतिरिक्त सैलरी देने का भी ऑफर रखा है, लेकिन यह केवल उन कर्मचारियों के लिए है जो आपसी सहमति (Mutual Agreement) से इस्तीफा देने को तैयार हैं।
भारतीय कर्मचारियों पर ही क्यों गिरी सबसे ज्यादा गाज?
छंटनी का शिकार हुए पूर्व कर्मचारियों का दर्द सोशल मीडिया पर छलक रहा है। पूर्व कर्मचारी मेरुगु श्रीधर के अनुसार, अमेरिका के कड़े श्रम कानूनों (Labor Laws) की तुलना में भारत और अन्य देशों में छंटनी करना कंपनियों के लिए आसान और सस्ता पड़ता है। यही वजह है कि अमेरिकी टेक कंपनियां छंटनी के वक्त अक्सर भारतीय केंद्रों को निशाना बनाती हैं। 40 फीसदी से ज्यादा भारतीयों का इस लिस्ट में होना भारतीय आईटी सेक्टर के लिए एक बड़े खतरे की घंटी है।
आईटी सेक्टर में छंटनी का सिलसिला जारी
ओरेकल से पहले गूगल, मेटा और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनियां भी पिछले कुछ महीनों में हजारों कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि 2026 की शुरुआत टेक सेक्टर के लिए काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है। ओरेकल ने फिलहाल इस पूरे मामले पर कोई भी आधिकारिक सार्वजनिक टिप्पणी करने से मना कर दिया है, लेकिन प्रभावित कर्मचारियों के लिए अब नई नौकरियों की तलाश एक बड़ी चुनौती बन गई है।

