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Assembly Election 2026: कहीं हिंदुत्व तो कहीं क्षेत्रीय अस्मिता… बंगाल से तमिलनाडु तक ‘पहचान की राजनीति’ का बोलबाला, विकास के मुद्दे गायब!

Digital Desk - Lucknow
Last updated: April 4, 2026 5:55 pm
Digital Desk - Lucknow
6 minutes ago
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Assembly Election 2026
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नई दिल्ली (अखंड राष्ट्र न्यूज़): पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों का शोर अपने चरम पर है, लेकिन इस बार की चुनावी बिसात पर सड़क, बिजली, पानी और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दे बैकस्टेज चले गए हैं। 2026 के इस रण में राजनीतिक दलों की स्क्रिप्ट विकास से हटकर ‘अस्मिता, संस्कृति और इमोशन’ पर टिक गई है। पश्चिम बंगाल से लेकर असम और तमिलनाडु तक, हर तरफ अपनी पहचान बचाने की दुहाई दी जा रही है।

Contents
पश्चिम बंगाल: राष्ट्रवाद बनाम ‘मछली-भात’ की राजनीतिअसम: UCC और ‘मियां’ फैक्टर पर टिकी जंगतमिलनाडु: हिंदुत्व बनाम ‘द्रविड़’ पहचानकेरल: सबरीमाला और ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ का खेल4 मई को होगा फैसला: काम जीतेगा या इमोशन?

पश्चिम बंगाल: राष्ट्रवाद बनाम ‘मछली-भात’ की राजनीति

बंगाल में 15 साल की सरकार के कामकाज की चर्चा कम और ‘पहचान’ की जंग ज्यादा दिख रही है।

  • BJP की रणनीति: बीजेपी यहाँ ‘राष्ट्रवाद’ और ‘धार्मिक संतुलन’ के नैरेटिव पर सवार है। घुसपैठ और डेमोग्राफिक बदलाव को मुद्दा बनाकर बहुसंख्यक मतदाताओं को एकजुट करने की कोशिश की जा रही है।

  • ममता का पलटवार: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इसे बंगाल की संस्कृति पर हमला बता रही हैं। ‘मछली और अंडा’ न खाने देने जैसे आरोपों के जरिए वे खान-पान और बंगाली गौरव (Regional Pride) को चुनावी ढाल बना रही हैं।

असम: UCC और ‘मियां’ फैक्टर पर टिकी जंग

असम में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने चुनाव को ‘असमिया अस्मिता बनाम घुसपैठिए’ की लड़ाई बना दिया है।

  • UCC का दांव: समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने का वादा कर बीजेपी हिंदू मतों को साध रही है।

  • घुसपैठ का मुद्दा: हिमंता बिस्वा सरमा ‘मियां’ (बांग्लादेशी घुसपैठियों) को बाहर निकालने और डेमोग्राफिक बदलाव का मुद्दा जोर-शोर से उठा रहे हैं, जिसे कांग्रेस असम की मिली-जुली संस्कृति पर प्रहार बता रही है।

तमिलनाडु: हिंदुत्व बनाम ‘द्रविड़’ पहचान

दक्षिण के इस महत्वपूर्ण राज्य में लड़ाई सीधे तौर पर दो विचारधाराओं के बीच है।

  • DMK का स्टैंड: स्टालिन की पार्टी ‘हमारी भाषा-हमारी संस्कृति’ का मुद्दा उठाकर द्रविड़ पहचान को बचाने की अपील कर रही है।

  • BJP का नैरेटिव: बीजेपी यहाँ हिंदुत्व और सनातन के मुद्दे के साथ अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है। तमिलनाडु की राजनीति में यह पहली बार है जब द्रविड़ अस्मिता को हिंदुत्व से इतनी कड़ी टक्कर मिल रही है।

केरल: सबरीमाला और ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ का खेल

केरल में इस बार ‘सबरीमाला मंदिर में सोना चोरी’ का मुद्दा सबसे ऊपर है। चाहे लेफ्ट हो, कांग्रेस हो या बीजेपी—तीनों ही दल खुद को केरल की संस्कृति और मंदिर परंपराओं का सबसे बड़ा रक्षक साबित करने में जुटे हैं। यहाँ विकास की जगह ‘सॉफ्ट रिलिजियस पॉलिटिक्स’ ने ले ली है।

4 मई को होगा फैसला: काम जीतेगा या इमोशन?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब विकास के मुद्दे गौण हो जाते हैं, तो चुनाव ‘ध्रुवीकरण’ की दिशा में मुड़ जाता है। अब जनता विकास के वादों पर यकीन करेगी या अपनी अस्मिता और संस्कृति के नाम पर वोट देगी, इसका खुलासा 4 मई के नतीजों में होगा। लेकिन एक बात साफ है—2026 के इन चुनावों ने साबित कर दिया है कि भारत में आज भी ‘पहचान की राजनीति’ सबसे बड़ा हथियार है।

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