सोशल मीडिया पर प्यारे….!
आज के दौर में….
रील पर रील बन रही है……..
हर हाथ को रोजगार भी मिला है…
और इसके ही बहाने…..
पीछे से नई-नई डील भी हो रही है….
रील के बहाने…व्यस्त होने भर का..
यहाँ सबको काम-काज मिला है…
और इसी बहाने…नए-नए उद्यम…
और संग में…नए-नए तरीकों का…
रोज आगाज हो रहा है….
तेजी से मुनाफे की भी तलाश है…
हर किसी को यहाँ….!
इसीलिए….रील बनाने में….
नहीं किसी का कोई….!
लिहाज हो रहा है….
कोई रील बना रहा है…तो…
कोई रील बनवा रहा है….
कोई रील देख रहा है…तो…
कोई यही रील दिखवा रहा है….
कोई इस रील से अपने सिद्धांतों पर
मुहर मरवा रहा है….
हर एक रील में….देश दुनिया की…
कोई ना कोई कहानी है….
किसी में बचपन…तो…
किसी में बुढ़ापा….किसी रील में…
दिखती जवानी है…..
किसी में आज का सच है….तो….
किसी में बातें उठी पुरानी है
किसी ने सच को है दिखाया….तो…
किसी ने कहानी को मोड़ा है
किसी ने तोड़ डाला रिश्ता….तो….
किसी ने रिश्तों को…..!
बेहद मजबूती से जोड़ा है….
गौरतलब है मित्रों…..
रील की यह आभासी दुनिया…
सबको रीयल दिख रही है…..
सबको ही फील गुड करा रही है….
अँधेरे में ही कहो प्यारे….!
ताबड़तोड़ तीर पर तीर चला कर….
सबको रॉबिन हुड बना रही है….
कोई परदे में रहकर….तो….
कोई बेपरदा होकर….
कोई कल्पना के पहाड़ पर चढ़….
कोई जमीनी हकीकत बयाँ कर…
धकाधक….रील पर रील….!
बनाये जा रहा है….और….
ख़ुद ही मदमस्त होकर…..!
सीना फुलाए जा रहा है….
इस रील की दुनिया को लेकर प्यारे,
युवा वर्ग कह रहा है सारा का सारा..
कि इस रील के सहारे ही….!
वह दुनिया भर में …
तहलका मचाए जा रहा है…..
वहीं कह रही है बूढ़ी पीढ़ी
कि इस रील के सहारे…..!
बहुतेरों को भरमाया जा रहा है…
विषय यह विवाद का….
हो सकता है प्यारे…पर….
सच है यही कि…. रील का रोग….
दिन-प्रतिदिन सबको ही…..!
रिझाये जा रहा है….भाए जा रहा है
रील का रोग….
दिन-प्रतिदिन सबको ही…..!
रिझाये जा रहा है….भाए जा रहा है
रचनाकार….
जितेन्द्र कुमार दुबे
अपर पुलिस उपायुक्त, लखनऊ
