सोनभद्र (रेणुकूट): सोनभद्र जनपद के प्रतिभावान खिलाड़ी रवि सिंह ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का गौरव बढ़ाया है। हिंडालको इंडस्ट्रीज लिमिटेड रेणुकूट के बॉयलर को-जनरेशन विभाग में कार्यरत रवि सिंह ने यूरोप महाद्वीप के रोमानिया देश की राजधानी बुखारेस्ट में आयोजित ‘8वीं वर्ल्ड क्वान की डो चैंपियनशिप 2026‘ में रजत पदक (सिल्वर मेडल) हासिल कर भारत, उत्तर प्रदेश और अपने गृह जनपद का नाम वैश्विक पटल पर अंकित कर दिया। 20 मई से 24 मई 2026 तक चली इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में दुनिया भर के 37 देशों से आए धुरंधर खिलाड़ियों ने अपनी चुनौती पेश की थी, जिसमें रवि सिंह ने शानदार खेल कौशल की बदौलत दूसरा स्थान प्राप्त किया।
प्रशासनिक अधिकारियों ने थपथपाई पीठ, भेंट किया स्मृति चिह्न
रवि सिंह की इस गौरवमयी उपलब्धि से पूरे सोनभद्र जिले में हर्ष का माहौल है। खिलाड़ी की वतन वापसी पर सोनभद्र के जिलाधिकारी श्री चर्चित गौड़ और पुलिस अधीक्षक श्री अभिषेक वर्मा ने रवि सिंह को विशेष रूप से सम्मानित किया। दोनों शीर्ष अधिकारियों ने उन्हें पुष्पगुच्छ और माला पहनाकर बधाई दी और कहा कि रवि ने सीमित संसाधनों और कड़े संघर्ष के बल पर इस मुकाम को हासिल कर पूरे क्षेत्र के युवाओं के सामने एक नई मिसाल पेश की है।
ढोल-नगाड़ों की थाप पर थिरका रेणुकूट, हिंडालको परिवार ने पलक-पावड़े बिछाए
सिल्वर मेडल जीतकर लौटे रवि सिंह का रेणुकूट रेलवे स्टेशन पर पहुंचते ही स्थानीय नागरिकों और खेल प्रेमियों ने जोरदार स्वागत किया। वहां से लेकर हिंडालको के मानव संसाधन (HR) विभाग तक पूरे रास्ते ढोल-नगाड़े बजते रहे और साथी कर्मचारियों ने फूल-मालाओं से उन्हें लाद दिया। पूरा औद्योगिक क्षेत्र इस दौरान उत्सव के रंग में सराबोर नजर आया।

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हिंडालको प्रबंधन द्वारा रवि सिंह के सम्मान में एक विशेष अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर हिंडालको के मुखिया समीर नायक, क्लस्टर एचआर हेड जसबीर सिंह, एचआर हेड अजय सिन्हा, बॉयलर को-जेन हेड कैलाश प्रधान और कमल किशोर सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने रवि को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और उनके जज्बे की सराहना की।
भावुक हुए अंतरराष्ट्रीय विजेता, माता-पिता के चरणों में समर्पित की कामयाबी
इस बड़ी सफलता के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में रवि सिंह अपने पुराने दिनों और कठिन परिश्रम को याद कर बेहद भावुक हो गए। अपनी संघर्ष यात्रा का जिक्र करते हुए उनकी आंखें नम हो गईं। रवि ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने और मेडल जीतने के पीछे वर्षों की कड़ी तपस्या, अटूट अनुशासन और कड़ा मुकाबला रहा है। उन्होंने अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का पूरा श्रेय अपनी माता और अपने स्वर्गीय पिता महामाया प्रसाद सिंह को समर्पित किया। रवि ने कहा, “भले ही आज मेरे पूज्य पिता जी इस खुशी को देखने के लिए हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका आशीर्वाद और मार्गदर्शन हमेशा मेरे साथ रहा। माता-पिता के सपनों को पूरा करना ही मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा संकल्प था।” रवि सिंह की यह ऐतिहासिक जीत आज सोनभद्र और देश के अन्य युवाओं के लिए कड़ी मेहनत और लगन की एक नई प्रेरणा बन गई है।
