नई दिल्ली: मई 2025 में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) को लेकर देश में एक बहुत बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। इस सैन्य ऑपरेशन के करीब एक साल बाद सरकार द्वारा नेशनल वॉर मेमोरियल (राष्ट्रीय समर स्मारक) के ‘रोल ऑफ ऑनर’ और ‘त्याग चक्र’ पर देश के 6 जांबाज शहीदों के नाम दर्ज किए जाने के बाद से विपक्ष आगबबूला है। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सहित तमाम विपक्षी दलों ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्र की भाजपा सरकार पर देश से झूठ बोलने और सेना के जवानों के सर्वोच्च बलिदान को छिपाने का बेहद गंभीर आरोप लगाया है।
दरअसल, विवाद की मुख्य वजह रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का वह पुराना बयान है, जो उन्होंने एक साल पहले संसद के पटल पर खड़े होकर दिया था। तब उन्होंने देश को आश्वस्त करते हुए दावा किया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान “किसी भी भारतीय सैनिक को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।” लेकिन अब सरकार द्वारा खुद ही 6 शहीदों के नामों को आधिकारिक तौर पर जारी करने के बाद सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

आम आदमी पार्टी का तीखा हमला: ‘शहीदों के कफन पर घोटाला करने वाली भाजपा न जवानों की है, न राम की’
इस खुलासे के बाद दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पार्टी ‘आप’ (AAP) ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का संसद में दिया गया पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। आम आदमी पार्टी ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि भाजपा ने Operation Sindoor के दौरान हुए शहीदों की संख्या और हताहतों के बारे में देश की जनता को पूरी तरह गुमराह किया। ‘आप’ ने अपने बयान में बेहद तल्ख लहजे में कहा, “शहीदों के कफन पर घोटाला करने वाली भाजपा की यह हकीकत साफ करती है कि यह पार्टी न तो देश के बहादुर जवानों की है और न ही भगवान श्री राम की।“
संसद और देश से सच क्यों छिपाया? कांग्रेस और टीएमसी ने दागे कड़े सवाल
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने इस पूरे मामले को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा कि इस विसंगति के केवल दो ही कारण हो सकते हैं। या तो जब रक्षा मंत्री संसद को संबोधित कर रहे थे, तब उन्हें अपने ही मंत्रालय के तहत शहीद हुए 6 सैनिकों की जानकारी नहीं थी, जो उनकी प्रशासनिक अक्षमता को दिखाता है; या फिर उन्हें हकीकत पता थी और उन्होंने जानबूझकर देश और संसद से तथ्यों को छिपाया। पवन खेड़ा ने कहा, “चाहे जो भी सच हो, एक बात साफ है कि हमारे 6 वीर जवानों ने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, लेकिन उनकी शहादत को छिपाया गया। उन्हें उस समय उस सम्मान और पहचान से वंचित रखा गया जिसके वे हकदार थे।”
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने भी इस घटनाक्रम को ‘अत्यंत गंभीर’ करार दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि संसद और शहीदों के परिवार सच जानने के हकदार हैं। अगर 6 जवान शहीद हुए थे, तो रक्षा मंत्री ने संसद में यह कैसे कह दिया कि कोई नुकसान नहीं हुआ है? वहीं, बीजू जनता दल (BJD) की सांसद सुलता देव ने भी हैरानी जताते हुए कहा कि पिछले साल संसद में इस ऑपरेशन पर लंबी चर्चा हुई थी, लेकिन सरकार ने तब मौत के आंकड़ों को पूरी तरह दबाए रखा। उन्होंने पूछा कि आखिर सरकार इतनी महत्वपूर्ण और संवेदनशील जानकारी छिपाकर क्या हासिल करना चाहती थी?
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पहली बार आधिकारिक तौर पर सामने आए इन 6 जांबाजों के नाम
केंद्र सरकार द्वारा शुक्रवार को जारी की गई आधिकारिक सूची के अनुसार, Operation Sindoor के दौरान देश के लिए प्राण न्यौछावर करने वाले इन 6 वीर जवानों में भारतीय सेना के पांच जवान शामिल हैं:
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सूबेदार मेजर पवन कुमार
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राइफलमैन सुनील कुमार (वीर चक्र)
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लांस नायक दिनेश कुमार
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अग्निवीर मूड मुरलीनायक
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हवलदार सुनील कुमार सिंह

इनके साथ ही भारतीय वायुसेना के सार्जेंट सुरेंद्र कुमार भी इस ऑपरेशन में शहीद हुए थे। यह पहली बार है जब सरकार ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के साथ चले चार दिनों के संघर्ष में भारत ने अपने वीर जवानों को खोया था। अब विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को पूरी तरह घेरने और संसद से लेकर सड़क तक जवाब मांगने की रणनीति बना रहा है।

