आरटीआई के हवाले से दावा—16 महीनों में CISF की 856 छापेमारी, 15,008 मीट्रिक टन कोयला जब्त; करीब 12 करोड़ रुपये बताई गई अनुमानित कीमत

छाताबाद भू-धंसान और अवैध खनन पर पूर्व बियाडा अध्यक्ष विजय कुमार झा ने उठाए गंभीर सवाल, कोयलांचल के व्यापक सर्वे की मांग
धनबाद। पूर्व बियाडा अध्यक्ष विजय कुमार झा ने शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में कोयलांचल में लगातार हो रही भू-धंसान, गैस रिसाव, भूमिगत आग और कथित अवैध कोयला उत्खनन की घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने छाताबाद में हाल में हुई भू-धंसान की घटना का उल्लेख करते हुए डीजीएमएस, बीसीसीएल प्रबंधन, सीआईएसएफ, राज्य सरकार और केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए तथा पूरे कोयलांचल का वैज्ञानिक सर्वे कराकर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की।
विजय कुमार झा ने कहा कि छाताबाद में भू-धंसान के कारण एक ऐसा तालाब देखते-देखते विलीन हो गया, जिस पर पूरी बस्ती के हजारों लोग आश्रित थे। उन्होंने कतरी नदी और गजलीटांड़ क्षेत्र की स्थिति का जिक्र करते हुए आशंका जताई कि यदि पूर्व की तरह सात से आठ दिनों तक लगातार भारी बारिश होती है, तो कोयलांचल के कई क्षेत्रों में गंभीर परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।
उन्होंने कहा कि भू-धंसान और खनन प्रभावित क्षेत्रों की घटनाओं को सामान्य या छोटी-मोटी घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने केशलपुर मुंडा धौड़ा, टांडाबारी, केसरगढ़ा और बहियारडीह सहित विभिन्न क्षेत्रों में पूर्व में हुई घटनाओं और जनहानि का उल्लेख करते हुए कहा कि कोयलांचल के कई हिस्सों में लोगों के जीवन और संपत्ति पर लगातार खतरा बना हुआ है।
आरटीआई के आंकड़ों को लेकर किया बड़ा दावा
विजय कुमार झा ने दावा किया कि उन्होंने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत 1 जनवरी 2025 से 30 अप्रैल 2026 तक बीसीसीएल के क्षेत्र संख्या 1 से 12 में सीआईएसएफ द्वारा की गई छापेमारी, अवैध खनन स्थलों पर कार्रवाई, जब्त कोयले की मात्रा और उसकी कीमत से संबंधित जानकारी मांगी थी।
उन्होंने कहा कि आरटीआई के जवाब के अनुसार, महज 16 महीनों में 856 स्थानों पर छापेमारी की गई और लगभग 15,008 मीट्रिक टन कोयला जब्त किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 12 करोड़ रुपये बताई गई है।
झा ने सवाल उठाया कि यदि केवल 16 महीनों में इतनी बड़ी मात्रा में कोयले की बरामदगी हुई है, तो पिछले दस वर्षों के आंकड़ों की जांच करने पर वास्तविक स्थिति कितनी गंभीर हो सकती है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय खनिज संपदा की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए जिम्मेदार संस्थाओं से जवाबदेही तय करने की मांग की।
डीजीएमएस की भूमिका पर उठाए सवाल
विजय कुमार झा ने कहा कि खदानों की सुरक्षा, खनन नियमों और निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुपालन की निगरानी में डीजीएमएस की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने सवाल किया कि यदि किसी क्षेत्र में अवैध या असुरक्षित तरीके से उत्खनन हो रहा है, तो उसकी पहचान कर समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।
उन्होंने कहा कि सरकारी हो या गैर-सरकारी स्तर पर होने वाला खनन, यदि वह सुरक्षा मानकों और निर्धारित नियमों के विपरीत है, तो संबंधित संस्थाओं को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए। झा ने आरोप लगाया कि कोयलांचल में लगातार हो रही भू-धंसान और गैस रिसाव की घटनाएं निगरानी तथा जवाबदेही की व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं।
पूरे कोयलांचल का वैज्ञानिक सर्वे और श्वेत पत्र जारी करने की मांग
झा ने बताया कि करीब दो महीने पहले अप्रैल में उन्होंने डीजीएमएस को एक ज्ञापन सौंपकर पूरे कोयलांचल का व्यापक वैज्ञानिक सर्वे कराने की मांग की थी। उनका कहना है कि ऐसे सभी क्षेत्रों की पहचान होनी चाहिए, जहां 10 या 20 वर्ष पहले भूमिगत अथवा अन्य प्रकार का खनन हुआ और बाद में खदानें बंद हो गईं।
उन्होंने मांग की कि सर्वे के माध्यम से सार्वजनिक रूप से बताया जाए कि—
- किन क्षेत्रों में भू-धंसान का खतरा है,
- कहां जहरीली गैस के रिसाव की आशंका है,
- किन स्थानों पर भूमिगत आग सक्रिय है,
- कहां सैंड फिलिंग पर्याप्त रूप से नहीं हुई है और
- किन बस्तियों में जान-माल पर तत्काल या भविष्य में गंभीर खतरा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि डीजीएमएस को विशेषज्ञ संस्था होने के नाते ऐसे क्षेत्रों का निरीक्षण कर श्वेत पत्र जारी करना चाहिए और जहां उचित सैंड फिलिंग नहीं हुई है, वहां संबंधित कंपनी, बीसीसीएल प्रबंधन अथवा अन्य जिम्मेदार एजेंसियों को समयबद्ध कार्रवाई का निर्देश दिया जाना चाहिए।
गोधर गैस रिसाव का जिक्र, सार्वजनिक सूचना व्यवस्था की मांग
विजय कुमार झा ने गोधर क्षेत्र में गैस रिसाव के कारण मुख्य मार्ग बंद किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल सड़क बंद कर देना स्थायी समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने मांग की कि गैस प्रभावित क्षेत्रों में नियमित जांच की जाए और गैस के स्तर तथा पीपीएम संबंधी जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाए, ताकि आम लोगों को खतरे की वास्तविक स्थिति का पता चल सके और वे आवश्यक सावधानी बरत सकें।
उन्होंने दावा किया कि कुछ प्रभावित स्थानों पर गैस का स्तर सामान्य सुरक्षित सीमा से कई गुना अधिक पाए जाने की खबरें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में संबंधित संस्थाओं को किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय समय रहते ठोस और वैज्ञानिक कदम उठाने चाहिए।
छाताबाद की घटना को बताया गंभीर चेतावनी
झा ने कहा कि छाताबाद में लगातार हुई घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि कोयलांचल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तत्काल गंभीर कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि ऐसी घटना रात के समय किसी घनी आबादी वाले इलाके में होती है, तो बड़े पैमाने पर जनहानि हो सकती है।
उन्होंने पूर्व की एक गैस रिसाव संबंधी घटना का जिक्र करते हुए कहा कि कोयलांचल में भूमिगत आग, जहरीली गैस और भू-धंसान का खतरा वास्तविक है तथा इसके लिए दीर्घकालीन वैज्ञानिक समाधान आवश्यक है।
“कोयलांचल की जनता को भी आगे आना होगा”
प्रेस वार्ता के दौरान विजय कुमार झा ने कोयलांचल की जनता से भी जागरूक होने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिन गांवों, पंचायतों और क्षेत्रों में अवैध उत्खनन हो रहा है, वहां स्थानीय लोगों को अपनी आवाज उठानी होगी और जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों तथा संस्थाओं को उनके दायित्व की याद दिलानी होगी।
उन्होंने कहा कि देश की खनिज संपदा जनता की संपत्ति है और इसकी सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि राष्ट्रीय संपदा की लूट हो रही है, तो जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कोयला चोरी अब सामान्य चोरी की सीमा से आगे बढ़कर अत्यंत गंभीर और संगठित स्वरूप ले चुकी है।
अंत में विजय कुमार झा ने एक बार फिर डीजीएमएस से पूरे कोयलांचल का वैज्ञानिक सर्वे कराने, खतरनाक क्षेत्रों की सूची सार्वजनिक करने, भू-धंसान, भूमिगत आग और गैस रिसाव वाले क्षेत्रों के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाने तथा जिम्मेदार संस्थाओं की जवाबदेही तय करने की मांग की।

