Parliament: 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के आगामी मानसून सत्र (Monsoon Session of Parliament) से ठीक पहले देश का सियासी तापमान चरम पर पहुंच गया है। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह इस सत्र में जनता से जुड़े मुख्य मुद्दों को पूरी ताकत से उठाएगी। विपक्षी दल ‘इंडिया’ (INDIA) ब्लॉक के साथ मिलकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है, वहीं कांग्रेस नेताओं ने आशंका जताई है कि सरकार महत्वपूर्ण बहसों से बचने के लिए सदन की कार्यवाही में बाधा डाल सकती है।
इन बड़े मुद्दों पर सरकार को घेरेगा विपक्ष: गौरव गोगोई
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने मीडिया से बात करते हुए सरकार की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए:
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जनता के मुद्दे सर्वोपरि: गौरव गोगोई ने कहा कि विपक्ष जनता के जीवन से जुड़े हर जरूरी मामले को सदन में रखेगा।
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जवाबदेही से भागने का आरोप: उन्होंने सवाल उठाया कि क्या केंद्र सरकार अयोध्या विवाद, शिक्षा व्यवस्था की कमियों, ऑटोमोबाइल उद्योग की स्थिति, विदेश नीति और मणिपुर के संवेदनशील हालात पर जवाब देने के लिए तैयार है?
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सदन न चलने देने की आशंका: गोगोई ने आरोप लगाया कि सरकार इन गंभीर विषयों पर अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए संसद को सुचारू रूप से नहीं चलने देना चाहती। उन्होंने साफ किया कि सत्र में आने वाले विधेयकों पर ‘इंडिया’ गठबंधन के सहयोगियों और अन्य विपक्षी दलों के साथ आम सहमति बनाकर ही सामूहिक फैसला लिया जाएगा।
महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पर कड़ा टकराव तय
कांग्रेस ने 131वें संविधान संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर अपना रुख बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है। यह विधेयक संसद और विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण तथा लोकसभा सीटों के परिसीमन (Delimitation) से जुड़ा है।
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आरक्षण की आड़ में परिसीमन का विरोध: कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि महिला आरक्षण पर पार्टी का स्टैंड साफ है, लेकिन अगर महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन बिल लाया जा रहा है, तो कांग्रेस इसका पुरजोर विरोध करेगी।
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खड़गे ने पीएम मोदी को लिखा पत्र: राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर ‘संशोधित प्रस्तावों’ पर चर्चा के लिए तत्काल एक सर्वदलीय बैठक (All-Party Meeting) बुलाने की मांग की है, ताकि विपक्ष को बिल का अध्ययन करने का पर्याप्त समय मिल सके।
याद दिला दें: यह ऐतिहासिक विधेयक बीते 17 अप्रैल, 2026 को लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई (2/3) बहुमत न मिल पाने के कारण गिर गया था। इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे। अब चर्चा है कि सरकार इसे संशोधित रूप में दोबारा ला सकती है।
सियासी समीकरण और सीटों का गुणा-भाग
इस बार मानसून सत्र में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच संख्या बल का गणित भी बदला हुआ नजर आएगा। वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने संसदीय रणनीति समूह की बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस पर चर्चा की:
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लोकसभा सीटें 850 करने का लक्ष्य: प्रस्तावित परिसीमन विधेयक का मुख्य उद्देश्य लोकसभा सीटों की संख्या को बढ़ाकर 850 तक करना है।
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बदला हुआ संख्या बल: जयराम रमेश ने माना कि सदन में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की ताकत अब पहले से मजबूत हुई है। हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 सांसदों का नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय हुआ है, जबकि शिवसेना (UBT) के 6 सांसद एकनाथ शिंदे गुट वाली शिवसेना में शामिल हो चुके हैं।
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सुप्रिया सुले का स्पष्टीकरण: इस बीच, एनसीपी (शरद चंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने उन मीडिया रिपोर्टों को पूरी तरह से काल्पनिक और भ्रामक बताया है जिनमें कहा जा रहा था कि उनकी पार्टी परिसीमन बिल पर सरकार का समर्थन कर सकती है।
विपक्ष ने 19 जुलाई को सरकार द्वारा बुलाई गई आधिकारिक सर्वदलीय बैठक से पहले ही अपनी कमर कस ली है और साफ कर दिया है कि वह विपक्षी एकजुटता के साथ इस लड़ाई को सदन के पटल पर लड़ेगा।

