Assam: भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने Assam विधानसभा चुनावों के वर्ष 2026 के नतीजों में एक अभूतपूर्व और शानदार विजय हासिल की है। पूर्वोत्तर के इस महत्वपूर्ण राज्य में लगातार दूसरी बार सत्ता की कमान हासिल करना, प्रदेश के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की सुशासन-केंद्रित और विकासोन्मुखी नीतियों पर जनता के अडिग विश्वास को प्रमाणित करता है। कुल 126 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए ने 102 सीटों पर अपना कब्जा जमाकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
यह प्रचंड जनादेश मात्र एक चुनावी सफलता नहीं, बल्कि Assam की राजनीतिक दिशा और पहचान में आए सकारात्मक बदलाव की एक स्पष्ट कहानी है। राज्य की जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की कर्मठता को जिस तरह से स्वीकारा है, वह इस बात को रेखांकित करता है कि Assam अब प्रगति और समृद्धि के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
हिमंत बिस्वा सरमा का नेतृत्व और सुशासन
Assam के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने अपनी प्रशासनिक दक्षता और जन-कल्याणकारी दृष्टिकोण का एक बार फिर बेहतरीन प्रदर्शन किया है। उनकी पारंपरिक जालुकबारी सीट पर मतदाताओं ने उन्हें दिल खोलकर समर्थन दिया है। सरमा ने 112,186 वोटों का रिकॉर्ड स्तर छूते हुए अपने मुख्य विपक्षी उम्मीदवार को 80,000 से भी ज्यादा मतों के विशाल अंतर से हराया।
यह केवल एक निर्वाचन क्षेत्र तक सीमित परिणाम नहीं है, बल्कि यह बताता है कि पूरे राज्य में उनके द्वारा शुरू किए गए विकास कार्यों, शांति वार्ताओं और बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण को आम जनता ने हाथों-हाथ लिया है। उनके कार्यकाल में राज्य से उग्रवाद का पूरी तरह से सफाया हुआ है, और शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन आए हैं।
वोट शेयर में उछाल और जन-समर्थन का विस्तार
अगर हम आंकड़ों पर नजर डालें तो पार्टी की लोकप्रियता का ग्राफ निरंतर ऊपर की ओर गया है। साल 2016 में 33.6 प्रतिशत का वोट शेयर रखने वाली बीजेपी का वोट प्रतिशत 2026 में बढ़कर 38.59 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इस भारी बढ़ोतरी को सीधे तौर पर भाजपा के पक्ष में हिंदू मतदाताओं की एकजुटता और राष्ट्रवाद के प्रति उनके जुड़ाव के रूप में देखा जा सकता है।
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जन-कल्याणकारी योजनाएं: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई विभिन्न योजनाओं ने Assam के हर घर तक अपनी पहुंच बनाई है, जिससे युवाओं और महिलाओं का समर्थन सीधे भाजपा को मिला है।
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समान विकास की नीति: Assam के शहरी, ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में समान रूप से विकास की लहर दिखाई दी है। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि मतदाता अब जाति और धर्म की संकीर्ण राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रवाद और विकास को अत्यधिक महत्व दे रहे हैं।
क्षेत्रीय व सांप्रदायिक राजनीति का पतन और कांग्रेस की स्थिति
वर्ष 2026 के इन चुनावों ने Assam के राजनीतिक परिदृश्य से तुष्टीकरण और सांप्रदायिक एजेंडे को काफी हद तक बाहर का रास्ता दिखा दिया है। बदरुद्दीन अजमल की अगुवाई वाली ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) को परिसीमन का भारी नुकसान झेलना पड़ा है। उनकी पार्टी का वोट प्रतिशत जो कि 2016 में 9.4% हुआ करता था, वह अब घटकर मात्र 5.29% रह गया है और पार्टी महज 2 सीटों तक सिमट गई है। यह स्पष्ट करता है कि राज्य की जनता अब विभाजनकारी नीतियों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।
दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी की स्थिति में कोई खास सुधार देखने को नहीं मिला है। पार्टी का वोट शेयर 30 प्रतिशत से फिसलकर 29.26 प्रतिशत पर आ गया है। इसके अलावा, कांग्रेस के टिकट पर आगे चल रहे 19 उम्मीदवारों में से 18 उम्मीदवार एक विशेष धर्म से जुड़े हैं। यह तथ्य इस बात को पुख्ता करता है कि मुख्यधारा का विकास अब भी कांग्रेस के एजेंडे से दूर है और यह केवल एक वर्ग विशेष का समर्थन हासिल करने तक ही सीमित है।
गौरव गोगोई की हार और वंशवादी राजनीति का अंत
इस चुनाव का सबसे चौंकाने वाला नतीजा जोरहाट विधानसभा सीट से सामने आया है। राज्य में कांग्रेस पार्टी का मुख्य चेहरा माने जाने वाले गौरव गोगोई को इस सीट पर करारी हार का सामना करना पड़ा। उन्हें भारतीय जनता पार्टी के हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने 23,182 मतों के बड़े अंतर से मात दी।
यह हार ऊपरी Assam में कई दशकों से चले आ रहे गोगोई परिवार के राजनीतिक प्रभाव और दबदबे का एक प्रतीकात्मक अंत मानी जा रही है। चुनाव आयोग के अनुसार, हितेंद्र नाथ गोस्वामी को 69,439 वोट मिले, जबकि गौरव गोगोई 46,257 वोट ही हासिल कर सके। इस बड़े उलटफेर ने यह साबित कर दिया है कि नई पीढ़ी अब वंशवादी राजनीति को पूरी तरह से नकार चुकी है और जमीनी स्तर पर काम करने वाले योग्य नेताओं को तरजीह दे रही है।
सीटवार सारांश (चुनाव आयोग के अनुसार)
चुनाव आयोग के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, Assam विधानसभा में विभिन्न दलों की स्थिति इस प्रकार है:
| पार्टी / गठबंधन | जीती गई सीटें | आगे चल रही सीटें | कुल बढ़त/जीत |
| भारतीय जनता पार्टी (BJP) | 30 | 52 | 82 |
| गठबंधन (AGP & BPF) | – | 20 | 20 |
| NDA कुल | 30 | 72 | 102 |
| कांग्रेस (INC) | 1 | 18 | 19 |
| AIUDF | 1 | 1 | 2 |
| रायजोर दल (RJRD) | – | 2 | 2 |
राष्ट्रवाद का उदय और नेताओं की प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस ऐतिहासिक जनादेश के लिए Assam की जनता का तहे दिल से आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साझा और कुशल नेतृत्व की जीत है। सोनोवाल ने यह भी जोड़ा कि Assam की इस सफलता की छाप पश्चिम बंगाल में देखने को मिली है, जहां पार्टी ने पहली बार शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने भी इसे एक ऐतिहासिक जनादेश बताते हुए कहा कि पूरा पूर्वोत्तर पूरी तरह से भगवामय हो चुका है।
प्रधानमंत्री मोदी का मुख्यालय दौरा
इस प्रचंड जीत और पूर्वोत्तर में हुए विस्तार का जश्न मनाने के लिए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शाम 6:00 बजे नई दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय कार्यालय का दौरा करेंगे। इस मौके पर कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
2026 के इस चुनाव ने न केवल हिमंत बिस्वा सरमा को दोबारा सत्ता में वापस पहुंचाया, बल्कि Assam की राजनीतिक पहचान को भी नए आयाम दिए हैं। राज्य में अब मुख्य मुकाबला केवल दो विचारधाराओं के बीच रह गया है—एक तरफ भाजपा का राष्ट्रवाद और विकास, तो दूसरी तरफ कांग्रेस की पुरानी परंपरा। Assam की इस जीत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जनता सुशासन और मजबूत नेतृत्व के साथ खड़ी है।
