लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने रविवार को एक तेज पोस्ट के जरिए नया आह्वान किया है। उन्होंने युवाओं, विपक्षी दलों, सिविल सोसायटी और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले हर भारतीय से कहा है कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च करें।
पोस्ट में राहुल गांधी ने साफ कहा कि यह मार्च किसी पार्टी, जाति, समुदाय, राज्य, पुरुष या महिला के रूप में नहीं होगा। यह मार्च उन भारतीयों के रूप में होगा जो लोकतंत्र और संविधान में विश्वास रखते हैं। उन्होंने सभी विपक्षी नेताओं को मतभेद भुलाकर एक साथ आने का निमंत्रण दिया।
क्या कहा राहुल गांधी ने?
राहुल गांधी ने बोला :
“कल देश के युवा दिल्ली में शांतिपूर्वक विरोध करने निकले थे। उनके दिल में प्यार था, नफरत या गुस्सा नहीं। उन्हें पुलिस और भाजपा के गुंडों ने पीटा। ये वो भारत नहीं है जो हम चाहते हैं।
कल हम सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च करेंगे – भारतीयों के रूप में, पार्टी, जेंडर, जाति, समुदाय और राज्य से ऊपर उठकर। युवा, सभी विपक्षी दल, सिविल सोसायटी और जो भी लोकतंत्र और संविधान में विश्वास रखते हैं, हमारे साथ चलेंगे।
हम चीफ जस्टिस को देश की ओर से एक मेमोरेंडम सौंपेंगे। इसमें मांग होगी – वोट चोरी बंद हो, SIR रोका जाए और ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा हो।”
उन्होंने आगे कहा कि नरेंद्र मोदी, अमित शाह, अजित डोभाल और मोहन भागवत भारत की आवाज को नहीं दबा सकते। “ये कायर हमें डरा नहीं सकते। डरना मत। कल पूरा भारत सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च करेगा।”
क्यों महत्वपूर्ण है ये आह्वान?
शनिवार को सीजेपी के आह्वान पर युवा जंतर मंतर पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। मांग थी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ी पर जवाबदेही। लेकिन भारी सुरक्षा, बैरिकेडिंग और हजारों हिरासतों के कारण प्रदर्शन जमीन पर नहीं उतर पाया। कई युवाओं पर बल प्रयोग के आरोप लगे।
राहुल गांधी का यह पोस्ट उसी घटना के सीधे जवाब में आया है। उन्होंने साफ कहा कि युवा प्यार के साथ निकले थे, लेकिन उन्हें पीटा गया। और यही वो भारत नहीं है जो वे चाहते हैं।
सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च का आह्वान सिर्फ एक राजनीतिक कदम नहीं दिखता। ये उस असंतोष को कानूनी और संवैधानिक रास्ते पर ले जाने की कोशिश है, जो पिछले कई दिनों से सड़कों पर उतरने की कोशिश कर रहा था।
मेमोरेंडम में क्या मांगें?
मेमोरेंडम में तीन मुख्य मांगें हैं:
- कथित वोट चोरी पर रोक
- स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को तत्काल रोका जाए
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा
ये मांगें वही हैं जो पिछले कुछ समय से युवा और विपक्ष दोनों उठा रहे हैं। चुनावी प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों को अब सीधे सुप्रीम कोर्ट के सामने ले जाने की तैयारी है।
अब रविवार बीत चुका है, सोमवार का इंतजार
शनिवार को सड़कें बंद कर दी गईं, लीडर्स को प्लेन से उठाया गया, युवाओं को हिरासत में लिया गया। रविवार को राहुल गांधी ने नया रास्ता खोला – सुप्रीम कोर्ट की ओर।
जब कोई कहे कि “ये वो भारत नहीं जो हम चाहते हैं” और फिर सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च का आह्वान करे, तो सवाल साफ हो जाता है। लोकतंत्र में आवाज दबाने की कोशिशें कितनी भी तेज हों, आवाज खुद को नया रास्ता खोज ही लेती है।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के सामने जो मेमोरेंडम जाएगा, वो सिर्फ एक दस्तावेज नहीं होगा। वो उन हजारों युवाओं की आवाज भी होगा, जिन्हें शनिवार को सड़क पर उतरने नहीं दिया गया।

