दिल्ली के जंतर-मंतर पर 13 अक्टूबर 2026 की सुबह एक नया मोड़ आया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका, मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और अजिंक्य शिंदे समेत करीब 10-12 लोग ताला लगे गेट को चढ़कर अंदर घुस गए। उनके हाथों में तिरंगा था और नारे थे – “ग्यानेश कुमार इस्तीफा दो” और “भारत माता की जय”। दिल्ली पुलिस ने उन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया। रांका ने Instagram और अन्य प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किए वीडियो में साफ कहा कि वादा निभाया जा रहा है। जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ग्यानेश कुमार इस्तीफा नहीं देंगे, जंतर-मंतर का प्रोटेस्ट नहीं हटेगा।
“आज 10 लोग हैं, कल हजार और परसों 10 हजार। डिनोटिफाई करो या उखाड़ लो, इस्तीफा यहीं होगा।”
यह घटना एक दिन बाद हुई जब दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रोटेस्ट साइट से हटा दिया था। पुलिस आयुक्त अनुरग कुमार के 11 अक्टूबर के स्टैंडिंग ऑर्डर में रमलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और ईस्ट दिल्ली के CBD ग्राउंड को नए स्थल घोषित किया गया। यह फैसला गृह मंत्रालय की कमेटी की सिफारिश पर लिया गया, जो बार-बार के आंदोलनों से न्यू दिल्ली जिले में ट्रैफिक और प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होने के बाद आया था। CJP की तरफ से जवाब था कि प्रतिरोध को डिनोटिफाई नहीं किया जा सकता।
आशुतोष रांका IIT कानपुर के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने मैटेरियल्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और Students’ Gymkhana के प्रेसिडेंट रहे। बाद में लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई और McKinsey & Company में कंसल्टेंट के रूप में काम किया। CJP के प्रवक्ता बनने के बाद वे शिक्षा और चुनावी सुधारों के मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। पार्टी खुद को युवा नेतृत्व वाला सैटिरिकल मूवमेंट बताती है और पहले NEET पेपर लीक जैसे मुद्दों पर भी आंदोलन कर चुकी है।
इस बार का मोर्चा मुख्य चुनाव आयुक्त ग्यानेश कुमार और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के खिलाफ है। विपक्षी दलों और नागरिक समूहों का आरोप है कि मतदाता सूचियों से करोड़ों नाम हटाए गए, फॉर्म 6 में बदलाव बिना पर्याप्त सहमति के हुए और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता प्रभावित हुई। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया कि अन्य दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की। विपक्ष “वोट चोरी” का आरोप लगा रहा है और इस्तीफे की मांग कर रहा है। चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेदों को सामान्य बताया और फैसलों को सर्वसम्मत करार दिया। ग्यानेश कुमार का कोई इस्तीफा नहीं आया; वायरल हुए त्यागपत्र फर्जी बताए गए।
इससे पहले 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर और आसपास सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिनमें AAP की आतिशी, संजय सिंह और अन्य विपक्षी नेता शामिल थे। 10 अक्टूबर को CJP के अभिजीत दीपके, रांका और दास को दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान से ही डिटेन किया गया था। पुलिस ने बड़े पैमाने पर सुरक्षा तैनात की और अनुमति नहीं दी। इसके बावजूद CJP ने रोजाना मार्च का ऐलान किया था। 13 अक्टूबर को गेट चढ़कर अंदर घुसना और तुरंत हिरासत, दोनों पक्षों की जिद को दिखाता है। रांका का दावा है कि युवा पीढ़ी इस्तीफा लेकर रहेगी और वोट का अधिकार वापस लेगी।
रांका के बयान में “आज 10, कल 1000, परसों 10 हजार” का नंबर गेम है। यह पिछले दिनों की भीड़ और डिटेंशन के आंकड़ों के बीच एक चुनौती है। CJP का कहना है कि वे तानाशाही आदेशों के आगे नहीं झुकेंगे। दिल्ली पुलिस की तरफ से हिरासत की पुष्टि हुई और कुछ लोगों को जफ्फरपुर थाने ले जाया गया। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर फैले, जिसमें लोग गेट पार करते और नारे लगाते दिखे।
यह स्टैंडऑफ चुनावी प्रक्रिया पर चल रही बहस को सड़क पर ले आया है। एक तरफ आरोप हैं कि मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर बदलाव और आंतरिक असहमति से पारदर्शिता प्रभावित हुई, दूसरी तरफ प्रशासन का तर्क है कि कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक के लिए स्थल बदलना जरूरी था। जंतर-मंतर दशकों से विरोध का केंद्र रहा है। उसके डिनोटिफाई होने के बाद भी कुछ युवा कार्यकर्ताओं का गेट चढ़कर अंदर जाना और “इस्तीफा यहीं होगा” कहना, उस जगह की प्रतीकात्मक ताकत को बनाए रखने की कोशिश है।
रांका और उनके साथियों की हिरासत के बाद भी CJP का संदेश साफ है। वे प्रोटेस्ट को बढ़ाने की बात कर रहे हैं। क्या संख्या बढ़ेगी, क्या नए स्थलों पर या फिर जंतर-मंतर के आसपास ही प्रदर्शन जारी रहेगा, यह आने वाले दिनों में तय होगा। फिलहाल 13 अक्टूबर की सुबह का घटनाक्रम दिखाता है कि ग्यानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और जंतर-मंतर के इस्तेमाल को लेकर टकराव अभी खत्म नहीं हुआ है।

