मंगलेश्वर त्रिपाठी
जौनपुर। योगी सरकार की कानून व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। भाजपा के शासन काल में ही भाजपा के जिला मंत्री की हत्या कर दी गई है। मौके पर पुलिस छानबीन कर रही है। जौनपुर जिले के बोधापुर गांव निवासी भाजपा के जिला मंत्री प्रमोद यादव (55) को अज्ञात बदमाशों ने बृहस्पतिवार को सुबह उनके घर के बाहर ही गोली मार दी। दो बाइक सवार बदमाशो ने प्रमोद यादव को शादी का निमंत्रण कार्ड देने के बहाने रोक कर उनके उपर गोलियों की बौछार शुरू कर दिया और घटना स्थल से कुछ दूर आगे बाइक छोड़ फरार हो गए प्रत्यक्ष दर्शियों के अनुसार बदमाशो ने ताबड़तोड़ प्रमोद के शरीर में सात गोलियों दागी और फरार हो गये। गोली लगने से घायल प्रमोद गिर कर छटपटाने लगे आसपास के लोग तत्काल उन्हे जिला अस्पताल लेकर भागे । वहीं, प्रमोद को जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। प्रमोद कुमार यादव मिलनसार और सज्जन व्यक्ति रहे उनको क्यों और किसने गोली मारी है यह समझ के परे है। घटना की खबर मिलने के बाद भाजपा के नेतागण और पुलिस के अधिकारी घटनास्थल से लेकर जिला अस्पताल तक पहुंचते रहे और भाजपाई अपने दल के नेता की हत्या पर शोकाकुल नजर आये। इस घटना से बोधापुर गांव में मातमी सन्नाटा पसर गया है।
घटना के बाद आसपास के ग्रामीण बदमाशो का पीछा जरूर किए लेकिन बदमाश हवा में असलहा लहराते भागने में सफल रहे।घटना की सूचना थाना सिकरारा को मिलते ही थाना प्रभारी तत्काल मौके पर पहुंचे घटनास्थल का निरीक्षण किया।मौके पर बदमाशों की बाइक को कब्जे में लेकर पुलिस जांच में जुटी है।इसके साथ ही आसपास के थानों की फोर्स एवं पुलिस के उच्चाधिकारी भी मौके पर पहुंच कर घटनास्थल का निरीक्षण करते हुए बदमाशो को पकड़ने के लिए पुलिस टीम को रवाना किया है। प्रत्यक्ष दर्शियों के अनुसार बदमाश गोली मारने के बाद बदलापुर की ओर भागे थे। बदमाश पीले रंग के कपड़े पहने थे, ऐसा आसपास के ग्रामीण बता रहे है। इस गोलीकांड की घटना ने एक बार फिर योगी सरकार की कानून व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। हालांकि अब जिले के पुलिस अधिकारी दावा कर रहे है कि जल्दी ही बदमाश जेल में नजर आएंगे।
इस घटना से एक बार फिर कानून व्यवस्था को लेकर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। आम जन एक ही बात कर रहा है कि योगी सरकार किस कानून के राज की बात कर रही है । लोगों का कहना है कि भाजपा शासन काल में जब भाजपा के नेता ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम आदमी कितना सुरक्षित है ?

