मुंबई। पिछले 40 वर्षों से कांग्रेस के एक निष्ठावान सिपाही के रूप में काम करने वाले शिवसहाय सिंह राणा एक ऐसे उत्तर भारतीय नेता हैं, जिन पर जनता पूरा विश्वास करती है। कांग्रेस की खराब होती स्थिति के साथ-साथ जहां एक तरफ बड़े-बड़े उत्तर भारतीय दूसरी पार्टियों का दामन पकड़ते गए वहीं राणा कांग्रेस के एक निष्ठावान सिपाही के रूप में लगातार पार्टी के लिए जनता के बीच काम करते रहे। यही कारण है कि जनता उनकी अटूट निष्ठा को देखते हुए उन पर पूरा भरोसा करती है। 160, कांदिवली पूर्व विधानसभा से टिकट के लिए उन्होंने दावेदारी पेश की है। यहां की जनता को पूरा भरोसा है कि उनकी निष्ठा और जनता के बीच लगातार किए गए कार्यों को देखते हुए उन्हें टिकट अवश्य मिलेगा। निर्दलीय नगरसेवक के रूप में राजनीतिक पारी शुरू करने वाले राणा की उत्तर भारतीय समाज में अच्छी पैठ मानी जाती है। लोकसभा चुनाव के दौरान भी उन्होंने उत्तर मुंबई से दावेदारी पेश की थी, परंतु उस वक्त उन्हें आश्वासन देकर मराठी चेहरा को टिकट दिया गया। इसका खामियाजा भी कांग्रेस को भुगतना पड़ा। उत्तर मुंबई को उत्तर भारतीयों का गढ़ माना जाता है। कांदिवली, बोरीवली तथा मलाड दिंडोशी इलाकों में 30 से 35 प्रतिशत उत्तर भारतीय मतदाता हैं। शिवसहाय सिंह राणा उत्तर भारतीय समाज के लोकप्रिय और बेदाग चेहरा माने जाते हैं। यही कारण है कि जनता के साथ-साथ राजनीति से जुड़े लोगों का भी मानना है कि राणा को टिकट देने से कांग्रेस को फायदा होगा। पिछले कुछ वर्षों से उत्तर भारतीय नेताओं को साइड लाइन करने का प्रयास किया गया, जिसे लेकर भी उत्तर भारतीय समाज के मतदाताओं में आक्रोश देखा जा रहा है। प्रबुद्ध उत्तर भारतीय मतदाताओं का मानना है कि यदि भाजपा का मुकाबला करना है और जीत हासिल करनी है तो उत्तर भारतीय 2 , 3 हिंदू चेहरे को मैदान में उतारा जाए। ऐसे में राणा को टिकट देने से न सिर्फ कांदिवली पूर्व विधानसभा में फायदा मिलेगा,अपितु अन्य विधानसभा में भी इसका प्रभाव पड़ेगा। उत्तर भारतीयों के साथ-साथ अन्य समाज के लोगों का भी राणा को पूरा समर्थन है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तथा पूर्व मंत्री नसीम खान और महाराष्ट्र अध्यक्ष नाना पटोले लगातार उनकी सराहना करते रहे हैं। ऐसे में दोनों नेताओं का उनपर वरदहस्त माना जा रहा है।
शिवसहाय सिंह राणा की 40 सालों की निष्ठा पर जनता को पूरा भरोसा

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