मांग बना विधवा का रूदन
सिर्फ मंचों पर बजता है स्वास्थ्य संबंधित डंका
मुंगराबादशाहपुर।क्षेत्र में वर्तमान परिदृश्य में स्वास्थ्य संबंधित सेवाओं का अभाव एक लंबे अरसे से यहां की प्रमुख समस्या बन गई है। इसको चलते जनता में असंतोष बढ़ता जा रहा है।तो वहीं कोपभाजन के रूप में इसके समाधान के लिए वादा खिलाफी करने वाले बड़बोला जनप्रतिनिधियों के कद को छोटा करने व परिवर्तन करने की कवायद भी शुरू हो गई है। जनमानस की अन्तर्वेदना का परिणीति रहा कि शासन प्रशासन की हेरा फेरी में भी यह क्षेत्र की बुनियादी समस्या आज भी विधवा के रूदन के समान यथावत बना हुआ है। इसको लेकर जनमानस में त्राहिमाम त्राहिमाम मचा हुआ है। मंचों से भले ही स्वास्थ्य संबंधित सेवाओं में नेताओं की गर्जना सरीखे डंका बजते सुनाई देती हो, किंतु जमीन पर ऐसा कुछ नहीं दिखाई पड़ता है। कहने को तो तीन जनपदों में प्रयागराज,जौनपुर व प्रतापगढ के बीच में मुंगराबादशाहपुर स्थापित है।यहां पर ब्रिटिश हुकूमत में खोला गया एक सरकारी अस्पताल है।किन्तु उस पर स्वास्थ्य संबंधित सुविधाओं का लगातार अभाव बना हुआ है।सच तो यह है कि यहां पर स्वास्थ्य संबंधित सुविधाएं केवल कागजी घोड़ा बनकर कार्यालय में दौड़ रही है। यही हाल औद्योगिक क्षेत्र सतहरिया में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की भी है।जिसके चलते मरीजों को निजी अस्पतालों व निजी जांच सेंटरों पर जा कर धन दोहन का शिकार होना पड़ रहा है।उद्यमियों ने कई बार यहां पर ट्रामा सेंटर को खोलवाने की मांग को उठाया। किंतु उस पर अमली जामा पहनाने के बजाय वह ठंडे बस्ते में आराम फरमा रहा है। उद्यमियों का कहना है कि सतहरिया औद्योगिक क्षेत्र चार जनपदों में प्रयागराज,जौनपुर भदोही व प्रतापगढ़ के बीच में स्थित है।जिला मुख्यालय से दूरी 50 किलोमीटर है। हाइवे व औद्योगिक क्षेत्र के अंदर अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती है।जो तत्काल इलाज के अभाव में दम तोड़ देते है।ट्रामा सेन्टर खोलवाने के संबंध में एक प्रतिनिधिमंडल इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष बृजेश कुमार यादव के नेतृत्व में प्रदीप यादव, महेन्द्र यादव,गुलाब पाण्डेय व शत्रुघ्न मौर्या आदि के साथ जिला प्रशासन से लेकर तत्तकालीन नेताओं के चौखट पर परिक्रमा लगाने के बाद भी नतीजा सिफर रहा। तत्कालीन विधायक डॉ सुषमा पटेल ने इसे गंभीरता से लेते हुए 50 बेड का ट्रामा सेंटर यहां खोलवाने के लिए विधानसभा में भी इस मांग को उठाया था।लेकिन वह भी अधर में लटका हुआ है।जबकि पीएचसी मुंगरा व सीएचसी सतहरिया में इसके लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध है।

