प्राकृतिक खेती स्वस्थ एवं टिकाऊ : डॉ. सुरेश
– विवेक कुमार उपाध्याय
नौपेड़वा(जौनपुर): बक्शा कृषि विज्ञान केंद्र के प्रशिक्षण कक्ष में शुक्रवार को राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत कृषि सखी/सीआरपी के पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. सुरेश कुमार कन्नौजिया ने कहा कि प्राकृतिक खेती स्वस्थ एवं टिकाऊ है जिसकी उपयोगिता सदैव रहेगी। उन्होंने कृषि सखी/सीआरपी प्राकृतिक खेती की अवधारणा, सिद्धान्तों एवं होने वाले फायदे की जानकारी देते हुए अपने अनुभव को साझा किया। डॉ. सुरेश ने कृषि सखियों को मूल्य संवर्धन के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। पांच दिवसीय प्रशिक्षण समापन पर चयनित कृषि सखियों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण लेकर अपने खेत पर स्वयं रसायन मुक्त खेती करने हेतु प्रोत्साहित किया गया। क्लस्टर के चयनित कृषकों को भी गौ आधारित शून्य बजट वाली प्राकृतिक खेती हेतु प्रेरित किया गया। मिशन में जिले के 10 ब्लाकों से 55 क्लस्टर तैयार कर 2750 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 6875 कृषकों को प्राकृतिक खेती के लिए चिन्हित किया गया है प्रत्येक क्लस्टर में से दो कृषि सखी/सीआरपी का चयन किया गया है। इरी वाराणसी के वैज्ञानिक डॉ. विपिन कुमार ने कहा कि किसान प्राकृतिक खेती में रासायनिक खादों एवं कीटनाशको का उपयोग किए विना स्वस्थ एवं टिकाऊ खेती कर अपनी समृद्धि कर सकते है। उन्होंने धान की सीधी बुआई (डीएसआर) तकनीक की विस्तृत जानकारी दी। प्रशिक्षण में डॉ हरिओम, डॉ. रूपेश सिंह द्वारा पौधों में लगने वाले रोंगो एवं कीटों का प्राकृतिक उपचार, फसल चक्र के बारे में जानकारी प्रदान की गयी। प्राकृतिक खेती के विभिन्न घटको को जीवंत प्रयोग कराया गया। कार्यक्रम के अंतिम दिन फार्म प्रक्षेत्र भ्रमण एवं इंटीग्रेटेड फार्मिंग के विभिन्न मॉडल के बारे में जानकारी दी गयी। डॉ सुरेन्द्र प्रताप सोनकर ने धन्यवाद ज्ञापित किया।संचालन उप परियोजना निदेशक आत्मा डॉ. रमेशचंद्र यादव ने किया। इस दौरान एडीओ एजी अनुराग सिंह, अमित सिंह, नरेंद्र सिंह, अशोक कुमार सहित चयनित कृषि सखियां मौजूद रहें।

