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कुम्हार अलग कुछ गढ़ने वाला..
ढूढ़ता हूं मैं आजकल….!बिन मतलब के,झूठ-सच बकने वाला…नमक-मिर्च…
गाँव-गाँव, शहर-शहर. गली-गली और डगर-डगर. मैं ढूँढता हूँ अक्सर…!
गाँव-गाँव, शहर-शहर….गली-गली और डगर-डगर…मैं ढूँढता हूँ अक्सर…!एक ऐसा…
ढूढ़ता हूं मैं आजकल….!बिन मतलब के,झूठ-सच बकने वाला…नमक-मिर्च…
गाँव-गाँव, शहर-शहर….गली-गली और डगर-डगर…मैं ढूँढता हूँ अक्सर…!एक ऐसा…

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