लखनऊ के दुबग्गा इलाके में नशे का एक बड़ा कारोबार चल रहा था। रविवार की रात करीब 11 बजे एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स यानी ANTF की लखनऊ यूनिट और स्थानीय पुलिस की टीम दुबग्गा थाना क्षेत्र के महिपत मऊ गांव में पहुंची। सूचना के आधार पर टीम ने एक मकान को चारों तरफ से घेर लिया। बाहर से देखने पर यह सामान्य रिहायशी मकान लग रहा था, लेकिन अंदर नशे का पूरा कारोबार चल रहा था। पुलिस की यह कार्रवाई सिर्फ एक बरामदगी नहीं है, बल्कि शहर में नशे के बढ़ते नेटवर्क के खिलाफ सख्त संदेश भी है।
32 करोड़ की मॉर्फिन, कीमत सुनकर टीम भी रह गई हैरान
छापेमारी के दौरान टीम को 6.400 किलो संदिग्ध मॉर्फिन मिली। इसमें 3.600 किलो सूखा पाउडर और 2.800 किलो पिंडी के आकार का गीला पदार्थ शामिल था। पुलिस के मुताबिक इस मॉर्फिन की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 32 करोड़ रुपये है। इतनी बड़ी मात्रा में नशीला पदार्थ मिलने से टीम भी हैरान रह गई। यह साफ हो गया कि यहां छोटे स्तर का कारोबार नहीं, बल्कि संगठित नेटवर्क चल रहा था।
क्या-क्या बरामद हुआ, हथियार भी मिले
मॉर्फिन के अलावा मौके से और भी कई चीजें बरामद हुईं। एक .32 बोर की अवैध पिस्टल और छह जिंदा कारतूस मिले। इसके अलावा 16,170 रुपये नकद, छह मोबाइल फोन, एक स्कूटी और एक हुंडई वेन्यू कार भी जब्त की गई। मकान के अंदर काफी मात्रा में केमिकल और अन्य सामग्री भी मिली, जिससे साफ था कि यहां सिर्फ स्टॉक नहीं रखा जा रहा था, बल्कि नशीला पदार्थ तैयार भी किया जा रहा था।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं, एक बी-फार्मा पास
इस कार्रवाई में दो आरोपियों को मौके से गिरफ्तार किया गया। दोनों बाराबंकी जिले के कुर्सी थाना क्षेत्र स्थित मोहसंद टिकैतगंज गांव के रहने वाले हैं। पहला आरोपी मोहम्मद जुहैल है, जिसकी उम्र 25 साल है। दूसरा आरोपी अमजद है, जिसकी उम्र 22 साल बताई जा रही है। पुलिस जांच में सामने आया कि जुहैल बी-फार्मा पास है और उसने अपनी पढ़ाई का इस्तेमाल नशे के कारोबार में किया। पुलिस के अनुसार वही इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड था। यह बात चिंता की है कि पढ़े-लिखे युवा भी नशे के कारोबार में लिप्त पाए जा रहे हैं।
घर में ही बन रही थी हेरोइन, रोज बिकती थी एक किलो मॉर्फिन
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि इस मकान में मॉर्फिन से हेरोइन बनाने का काम भी चल रहा था। आरोपी सिर्फ मॉर्फिन का स्टॉक नहीं रखते थे, बल्कि उसे प्रोसेस करके हेरोइन तैयार करते थे। इसी मकान से मॉर्फिन और हेरोइन दोनों की बिक्री हो रही थी। एसीपी बीनू सिंह के अनुसार यह गिरोह रोज करीब एक किलो मॉर्फिन बेच रहा था। इसकी सप्लाई बरेली और मुंबई तक हो रही थी। यानी लखनऊ सिर्फ खपत का केंद्र नहीं, बल्कि बड़े नेटवर्क का हिस्सा बन चुका था।
नशे का नेटवर्क कैसे फैल रहा था, गुवाहाटी से मंगाया जाता था कच्चा माल
पुलिस सूत्रों के अनुसार आरोपी गुवाहाटी जैसे दूर के इलाकों से कच्चा माल और रसायन मंगवाते थे। तैयार माल को झारखंड, झांसी, हरदोई और बरेली समेत कई जिलों में सप्लाई किया जाता था। लखनऊ के रिहायशी इलाके में इतने बड़े स्तर पर नशे का कारोबार चलना पुलिस के लिए बड़ी चिंता का विषय था। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि छापेमारी के दौरान तीन और आरोपी फरार हो गए। उनकी तलाश जारी है और पुलिस अब पूरे नेटवर्क को उजागर करने में जुटी है।
पुलिस का रुख साफ, जीरो टॉलरेंस की नीति
एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश ने कहा कि यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश पुलिस की नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा है। एसपी ANTF चक्रेश मिश्रा, जिन्होंने इस कार्रवाई का नेतृत्व किया, ने बताया कि जुहैल जैसे पढ़े-लिखे युवक नशे के कारोबार में लिप्त पाए जा रहे हैं, जो चिंता का विषय है। बरामद मॉर्फिन और अन्य सामान को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है, ताकि सप्लाई चेन के और लोगों तक पहुंचा जा सके। मोबाइल फोन और वाहनों से जुड़े सबूतों की भी जांच चल रही है।
नशे का कारोबार अब छोटे स्तर पर नहीं रह गया
यह घटना दिखाती है कि नशे का कारोबार अब छोटे स्तर पर नहीं रह गया है। पढ़े-लिखे युवा भी इसमें शामिल हो रहे हैं और रिहायशी इलाकों में फैक्टरियां चल रही हैं। पुलिस का यह एक्शन ऐसे नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लखनऊ और पूरे उत्तर प्रदेश में नशे के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। पुलिस का संदेश साफ है कि नशे के कारोबार में शामिल किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।


