धनबाद। जोगता थाना क्षेत्र के सिजुआ तीन पटिया भुइंया पट्टी में 8 सितंबर को हुए भू-धंसान में 10 वर्षीय विक्रम की मौत के बाद करीब 63 घंटे तक चला धरना आखिरकार समाप्त हो गया। मृतक के शव के साथ बीसीसीएल के सिजुआ एरिया-5 कार्यालय के मुख्य द्वार पर बैठे परिजनों और स्थानीय लोगों के बीच प्रबंधन के साथ बातचीत के बाद मुआवजा, प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और घायल लोगों के इलाज समेत कई मांगों पर सहमति बनने की बात सामने आई। इसके बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने की तैयारी शुरू हुई।

हालांकि, इसी दौरान डुमरी विधायक जयराम महतो के पहुंचने के बाद मुआवजे की स्पष्ट राशि सार्वजनिक रूप से बताए जाने को लेकर माहौल एक बार फिर गरमा गया। विधायक ने मृतक के पिता, प्रभावित परिवार, स्थानीय नेताओं, जनप्रतिनिधियों और मीडिया की मौजूदगी में प्रबंधन से यह स्पष्ट करने को कहा कि मृतक के परिवार को आखिर कितनी राशि दी जाएगी। इस दौरान कुछ लोगों के साथ उनकी कहासुनी भी हुई।

प्रबंधन ने क्या कहा?
तेतुलमारी थाना में एरिया-5 के जीएम निर्झर चक्रवर्ती ने कहा कि धरना-प्रदर्शन के दौरान शव रखे जाने को लेकर प्रबंधन की ओर से भी प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। उनका कहना था कि अब मामला न्यायालय में देखा जाएगा।
जीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि जिस क्षेत्र में अवैध खनन के कारण भू-धंसान की स्थिति बनी है, वह उनके क्षेत्राधिकार में आता है। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए जो भी संभव होगा, प्रबंधन की ओर से किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि जब प्रबंधन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है तो मुआवजे से संबंधित आगे की प्रक्रिया भी कानूनी पहलुओं को देखते हुए की जाएगी।

कांग्रेस नेता ने बताई समझौते की स्थिति
कांग्रेस नेता अशोक लाला के अनुसार, तेतुलमारी थाना प्रभारी, जोगता थाना प्रभारी, भाटडीह ओपी प्रभारी, बाघमारा अनुमंडल पदाधिकारी, बीसीसीएल के वरिष्ठ अधिकारी, जीएम, प्रोजेक्ट मैनेजर और स्थानीय समाज के गणमान्य लोगों की मौजूदगी में बातचीत हुई।
उन्होंने दावा किया कि मृतक विक्रम के परिवार के लिए सम्मानजनक मुआवजा देने तथा भू-धंसान से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को लेकर प्रबंधन की ओर से सहमति जताई गई। इसके बाद धरना समाप्त कर शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने पर सहमति बनी।

मनोज भुइयां, विशाल वाल्मीकि और छोटू रवानी समेत स्थानीय लोगों ने भी प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मृतक के परिवार को सम्मानजनक मुआवजा दिलाने को लेकर सहमति जताते हुए धरना समाप्त करने की बात कही।


मुआवजे की राशि पर विधायक ने उठाया सवाल
धरना समाप्त होने और शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने की प्रक्रिया शुरू होने के बीच डुमरी विधायक जयराम महतो मौके पर पहुंचे। विधायक ने सवाल उठाया कि जब परिवार कई दिनों से शव के साथ बैठा था, तो इतने समय बाद बातचीत क्यों हुई।

उन्होंने प्रबंधन और संबंधित लोगों से मीडिया तथा जनता के सामने मुआवजे की निश्चित राशि स्पष्ट रूप से बताने की मांग की। विधायक का कहना था कि केवल मुआवजा देने की बात पर्याप्त नहीं है, बल्कि परिवार को यह भी पता होना चाहिए कि उन्हें कितनी राशि मिलेगी और पुनर्वास की व्यवस्था किस प्रकार की जाएगी।
मुआवजे की राशि को लेकर मौके पर स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाने के बाद विधायक और कुछ प्रभावित परिवारों व स्थानीय लोगों के बीच कहासुनी की स्थिति बन गई। इसी बीच शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया।
एसडीपीओ ने बताई पूरी स्थिति
बाघमारा एसडीपीओ अजीत कुमार विमल ने पत्रकारों को बताया कि 8 सितंबर को जोगता थाना क्षेत्र में पुरानी कोल माइंस क्षेत्र में भू-धंसान की घटना हुई थी। इसमें कई घर जमीन में धंस गए और एक बच्चे की मौत हो गई।

उन्होंने बताया कि घटना के बाद पीड़ित परिवार और आसपास के लोगों ने प्रबंधन पर दबाव बनाने के लिए शव को लेकर सिजुआ एरिया-5 स्थित बीसीसीएल कार्यालय के मुख्य द्वार पर धरना दिया था।
एसडीपीओ के अनुसार, बातचीत के बाद प्रबंधन और प्रभावित लोगों के बीच इस बात पर सहमति बनी कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए बेहतर व्यवस्था की जाएगी। पीड़ित परिवार को आर्थिक सहयोग देने, मृतक के पिता को आउटसोर्सिंग में काम उपलब्ध कराने तथा घटना में घायल लोगों का सेंट्रल अस्पताल में बेहतर इलाज कराने की बात पर भी सहमति बनी है।
एसडीपीओ ने कहा कि प्रशासन पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और बातचीत में जिन बिंदुओं पर सहमति बनी है, उनके क्रियान्वयन को लेकर भी नजर रखी जाएगी।
प्रबंधन की शिकायत पर भी होगी कार्रवाई
एसडीपीओ ने बताया कि बीसीसीएल प्रबंधन की ओर से काम बाधित होने को लेकर प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया गया है। पुलिस आवेदन की जांच करेगी और यदि प्राथमिकी दर्ज करने योग्य तथ्य पाए जाते हैं तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब सबसे बड़ा सवाल—कागज पर कितना और कब?
करीब 63 घंटे तक चले इस आंदोलन के बाद धरना तो समाप्त हो गया और विक्रम के शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया, लेकिन पूरे मामले में अब सबसे अहम सवाल मुआवजे की निश्चित राशि, पुनर्वास की समयसीमा और पीड़ित परिवार के रोजगार की लिखित व्यवस्था को लेकर है।
प्रबंधन की ओर से पुनर्वास और आर्थिक सहायता की सहमति की बात कही गई है, जबकि मौके पर मुआवजे की निश्चित रकम सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हो सकी। ऐसे में प्रभावित परिवार और स्थानीय लोगों की निगाह अब इस बात पर है कि बातचीत में बनी सहमति वास्तव में जमीन पर कब उतरती है।
एक मासूम की मौत के बाद उठे सवाल अब सिर्फ मुआवजे तक सीमित नहीं हैं। असली परीक्षा यह है कि प्रभावित परिवारों को सुरक्षित ठिकाना, पीड़ित परिवार को सम्मानजनक सहायता और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जिम्मेदार तंत्र क्या ठोस कदम उठाता है।

