UP Census 2027: उत्तर प्रदेश में जनगणना 2027 के महा-अभियान ने आज से एक नए और निर्णायक चरण में प्रवेश कर लिया है। इंटरनेट के माध्यम से ‘सेल्फ-एन्युमरेशन’ (स्व-गणना) की तय समय-सीमा समाप्त होने के साथ ही, आज यानी 22 मई से पूरे प्रदेश में ग्राउंड लेवल पर फील्ड सर्वे (Field Survey) और हाउस लिस्टिंग की शुरुआत हो चुकी है। अब जनगणना विभाग की विशेष टीमें सीधे नागरिकों के दरवाजे पर पहुंचकर पारिवारिक व आवासीय आंकड़े जुटाएंगी।
जनगणना की मुख्य अधिकारी शीतल वर्मा ने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि जिन लोगों ने व्यस्तता या किसी अन्य वजह से ऑनलाइन पोर्टल पर अपना विवरण दर्ज नहीं किया था, उन्हें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। आज से शुरू हुए इस मैदानी चरण में प्रगणक (Enumerators) खुद हर घर जाकर डेटा अपडेट करेंगे।
कैसा होगा जमीनी सर्वे? नागरिकों को करने होंगे ये जरूरी काम
तकनीक को बढ़ावा देते हुए इस बार पूरी प्रक्रिया को हाई-टेक बनाया गया है:
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पूरी तरह डिजिटल डेटा एंट्री: फील्ड पर उतरे कर्मचारी किसी कागजी रजिस्टर के बजाय एक खास तौर पर तैयार किए गए मोबाइल ऐप में सीधे लाइव डेटा फीड करेंगे।
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10 से 15 मिनट का समय अनिवार्य: जब प्रगणक आपके घर आएं, तो परिवार के मुखिया को केवल 10 से 15 मिनट का समय निकालकर उनके सवालों के सही जवाब देने होंगे।
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ऑनलाइन कर चुके लोगों के लिए नियम: जिन परिवारों ने 7 मई से 21 मई के बीच ce.census.gov.in पोर्टल पर स्व-गणना पूरी कर ली है, उन्हें लंबा फॉर्म दोबारा नहीं भरना होगा। उन्हें केवल अपने पास सुरक्षित 11-अंकों की आईडी (Alphanumeric ID) कर्मचारी को दिखानी होगी, जिसे स्कैन या दर्ज करते ही डेटा तुरंत सत्यापित हो जाएगा।
UP Census 2027: यूपी में 44 लाख से ज्यादा परिवार हुए डिजिटल
कल समाप्त हुए ऑनलाइन चरण के आंकड़ों के विश्लेषण से साफ है कि डिजिटल तकनीक को अपनाने में ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के नागरिकों ने महानगरों को काफी पीछे छोड़ दिया है। पूरे राज्य में करीब 44 लाख परिवारों ने डिजिटल माध्यम से अपनी गणना खुद की।
डिजिटल स्व-गणना में सबसे आगे रहने वाले जिले (Top-3 Districts):
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आजमगढ़: रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन करते हुए आजमगढ़ पूरे उत्तर प्रदेश में नंबर-1 पर रहा। यहाँ सबसे ज्यादा 2.64 लाख परिवारों ने खुद ऑनलाइन फॉर्म सबमिट किया।
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शाहजहांपुर: 2.61 लाख डिजिटल फॉर्म के साथ राज्य में दूसरे पायदान पर रहा।
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बरेली: 2.51 लाख सफल पंजीकरणों के साथ यह जिला तीसरे स्थान पर रहा।
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अन्य अव्वल जिले: मुरादाबाद में 2.20 लाख और सोनभद्र में 1.59 लाख लोगों ने ऑनलाइन प्रक्रिया चुनी।
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ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन में सबसे पीछे रहने वाले जिले (Bottom-5 Districts):
यह बेहद चौंकाने वाला है कि हाई-टेक इंफ्रास्ट्रक्चर होने के बावजूद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और प्रदेश के बड़े वीआईपी जिले इस रेस में सबसे पीछे नजर आए। स्वयं प्रदेश की राजधानी लखनऊ बॉटम-5 में जगह बना सकी:
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लखनऊ: यहाँ की विशाल आबादी में से महज 84,158 लोगों ने ही ऑनलाइन मोड को अपनाया।
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गौतमबुद्धनगर (नोएडा): हाई-टेक सिटी होने के बाद भी यहाँ की स्थिति सबसे चिंताजनक रही, जहाँ केवल 15,543 लोगों ने फॉर्म भरा।
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अन्य न्यूनतम जिले: जालौन (15,905), संतकबीरनगर (14,874), हमीरपुर (14,600) और पूरे सूबे में सबसे कम कौशांबी में सिर्फ 12,537 पंजीकरण हुए।
सुरक्षा पर दोटूक: सरकारी विभाग भी नहीं देख सकेंगे आपका व्यक्तिगत डेटा
जनगणना निदेशक कार्यालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने क्षेत्र में आने वाले सरकारी कर्मियों को सही जानकारी देकर इस राष्ट्रीय कार्य में सहयोग करें। अधिकारियों ने साफ किया है कि इस महा-अभियान में लिया जाने वाला आपका व्यक्तिगत और पारिवारिक डेटा ‘जनगणना अधिनियम’ (Census Act) की सख्त धाराओं के तहत सुरक्षित रहता है। इस डेटा को किसी भी बाहरी व्यक्ति, संस्था या यहाँ तक कि किसी अन्य सरकारी विभाग के साथ भी शेयर नहीं किया जा सकता।
