मुंबई। महानगरपालिका का चुनाव सन्निकट है और विरोधियों की हालत खराब है। ऐसे में मराठी का मुद्दा उठाकर महाराष्ट्र की गौरवशाली संस्कृति और समृद्ध परंपरा को बाधित करने का प्रयास किया जा रहा है। मराठी भाषा को लेकर परप्रांतियो के साथ की जा रही मारपीट को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए बोरीवली के भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने कहा कि महाराष्ट्र में रहने वाले अन्य प्रांतों के लोग भी महाराष्ट्र और मराठी से उतना ही प्यार करते हैं, जितना यहां के लोग करते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी और मराठी दोनों भाषाओं की लिपि देवनागरी है तथा संस्कृत दोनों भाषाओं की जननी है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में रहने वाला कोई भी व्यक्ति सपने में भी मराठी के अनादर की बात नहीं सोच सकता। आने वाली पीढ़ियां इतनी धड़ल्ले से मराठी बोल रही हैं कि बिना नाम बताएं कोई बता भी नहीं सकता कि उनका सरनेम क्या है? श्री उपाध्याय ने कहा कि इस बार मुंबई महानगरपालिका से विपक्ष का सफाया होने जा रहा है। यही कारण है कि विपक्ष लोगों को आपस में लड़ाकर अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने में लगा हुआ है। परंतु जनता सब जानती है और आने वाले दिनों में ऐसे लोगों को करारा सबक सिखाएगी।
मनपा चुनाव में पराजय के डर से उठाया जा रहा मराठी का मुद्दा: संजय उपाध्याय
ओमकार त्रिपाठी राजनीतिक विश्लेषक है, इसी के साथ
पिछले कई वर्षों से उत्तर प्रदेश की जमीनी राजनीति, प्रशासनिक हलचल और खोजी पत्रकारिता (Crime & Investigative Reporting) में सक्रिय। 19 वर्ष पुराने प्रतिष्ठित अखबार दैनिक अखंड राष्ट्र (Akhand Rashtra) के स्थानीय संपादक है,
Omkar Tripathi विशेष तौर पर निष्पक्ष आवाज और पारदर्शी गवर्नेंस के लिए प्रतिबद्ध है
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