सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में वोटर लिस्ट के विशेष संशोधन (SIR) को जारी रखने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने चुनाव आयोग को सुझाव दिया कि आधार कार्ड, वोटर कार्ड और राशन कार्ड को पहचान के वैध दस्तावेजों के रूप में शामिल किया जाए। यह निर्णय बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले लिया गया है। कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक संस्था के काम में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता, लेकिन उसने आयोग से यह सुनिश्चित करने को कहा कि कोई भी मतदाता इस प्रक्रिया में वंचित न हो। याचिकाकर्ताओं ने इस संशोधन को जल्दबाजी में लिया गया कदम बताया, लेकिन चुनाव आयोग ने इसे संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा करार दिया। अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी, जिसमें आयोग को जवाब दाखिल करने को कहा गया है। कोर्ट ने यह भी चिंता जताई कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए, ताकि कोई भी नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रहे। इस फैसले से बिहार में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन को दी मंजूरी
ओमकार त्रिपाठी राजनीतिक विश्लेषक है, इसी के साथ
पिछले कई वर्षों से उत्तर प्रदेश की जमीनी राजनीति, प्रशासनिक हलचल और खोजी पत्रकारिता (Crime & Investigative Reporting) में सक्रिय। 19 वर्ष पुराने प्रतिष्ठित अखबार दैनिक अखंड राष्ट्र (Akhand Rashtra) के स्थानीय संपादक है,
Omkar Tripathi विशेष तौर पर निष्पक्ष आवाज और पारदर्शी गवर्नेंस के लिए प्रतिबद्ध है
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