– पंकजा झा
“सभ्यता और नम्रता से जीवन जिएं। समय और परिस्थितियां आपके सारे अभिमान को एक दिन मिट्टी में मिला देंगी। ये सबसे अधिक बलवान हैं।”
व्यक्ति अपने धन बल विद्या रूप सौंदर्य संपत्ति सोना चांदी बंगला गाड़ी आदि वस्तुओं के अभिमान में यह भूल जाता है, कि “कल ऐसी भी परिस्थिति आएगी, जब मैं असमर्थ हो जाऊंगा, और मेरा यह सारा अभिमान चूर चूर हो जाएगा।”
जब व्यक्ति के पास ये संपत्तियां होती हैं, तब वह इन संपत्तियों के इतने अधिक नशे में होता है, कि उसे दूसरा कुछ दिखाई ही नहीं देता। दूसरों को वह मक्खी मच्छर जैसा समझता है, और यह भी मानता है, कि “मेरी ताकत मेरी संपत्तियां सदा ऐसे ही बनी रहेंगी। आज जो मेरा समाज के लोगों पर दबाव है, यह सदा ऐसा ही बना रहेगा।”
ऐसा सोचना मनुष्य की बहुत भयंकर भूल है। क्योंकि इतिहास बताता है, कि “जब सिकंदर जैसे बलवान लोग नहीं रहे, बड़े-बड़े डाकू लुटेरे हत्यारे आतंकवादी, बड़े-बड़े राजा महाराजा कोई नहीं रहे, तो आज के इस प्रकार के दुरभिमानी लोग भी क्या सदा रहेंगे?” ऐसे लोग इतिहास के पन्नों से इस बात को क्यों नहीं सीखते, कि यहां कोई सदा न रहा, और न रहेगा। उन पुराने अभिमानी लोगों का अभिमान मिट्टी में मिल गया, तो हमारा भी 1 दिन मिट्टी में मिल जाएगा।” ऐसा क्यों नहीं सोचते?
ऐसा सोचना चाहिए। इसका परिणाम यह होगा, कि “मनुष्य में नम्रता आएगी। सभ्यता आएगी। वह अभिमान के नशे में दूसरों पर अन्याय अत्याचार नहीं करेगा। सभ्यता और नम्रता से जीवन जिएगा। छोटे बड़े सभी के साथ उचित व्यवहार करेगा। सबको सुख देगा। पुण्य कमाएगा और उसका यह जीवन तथा अगला जीवन भी दोनों सुधर जाएंगे।” इसलिए धन-संपत्ति बल विद्या बुद्धि का अभिमान नहीं करना चाहिए। समय और परिस्थितियों के अनुसार यह सब एक दिन खो जाएगा। क्योंकि समय और परिस्थितियां बदलने में देर नहीं लगती। ये सभी से अधिक बलवान हैं।”
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दर्द की अपनी एक कहानी है
ना कोई राजा और ना कोई रानी है
सबकी जिंदगी निजी है लेकिन
उस पर कुदरत की मेहरबानी है…..

