कृष्ण कुमार नोनिया (अखंड राष्ट्र)
रांची: झारखंड के गिरिडीह निवासी एक व्यक्ति की ट्रेन में मौत के बाद आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन पर पुलिस द्वारा बिना परिजनों की मौजूदगी के शव का अंतिम संस्कार करने का मामला सामने आया है। इस पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वत: संज्ञान लिया है और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव व डीजीपी से दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट तलब की है।
मामला 5 अगस्त का है, जब अजमेर-सियालदह एक्सप्रेस के सामान्य डिब्बे से एक अज्ञात शव बरामद हुआ। जीआरपी पुलिस ने शव की पहचान के लिए प्रयास किया, परिजनों को फोटो भेजा गया लेकिन किसी ने पुष्टि नहीं की। 72 घंटे शव रखने की बाध्यता के बाद, चार दिन बाद 9 अगस्त को पुलिस ने अंतिम संस्कार कर दिया।
परिजन 15 अगस्त को आगरा पहुंचे और फोटो से शव की पहचान सीताराम उर्फ पाली यादव (40), निवासी अदुआडीह, गिरिडीह के रूप में की। तब तक शव का दाह संस्कार हो चुका था।
स्वजन का आरोप है कि वे गरीबी और यात्रा में कठिनाई के कारण समय पर नहीं पहुंच पाए। शव का अंतिम संस्कार पुलिस ने जल्दबाजी में कर मानवाधिकारों का हनन किया। वहीं, पुलिस का कहना है कि मृतक की मृत्यु फेफड़े की बीमारी से हुई थी और परिजनों द्वारा पहचान से इनकार करने के बाद नियमानुसार दाह संस्कार किया गया।
आयोग का मत है कि पुलिस को शव के अंतिम संस्कार से पहले परिजनों का पर्याप्त इंतजार करना चाहिए था। अब आयोग ने इसे गंभीर मानते हुए यूपी प्रशासन से जवाब मांगा है।

