भाजपा नेताओं ने पीड़ित को संघ नेता तक पहुंचाने में की मदद
जौनपुर। शाहगंज विवादित जमीन पर हुए कब्जे का मामला दिन प्रतिदिन गरम होते जा रहा है। जिले के उच्चाधिकारियों और मुख्यमंत्री तक न्याय की गुहार लगाने वाला पीड़ित परिवार अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बैठक तक पहुंच गया। जहां हाथ जोड़कर अपनी जमीन को विधायक से बचाने की गुहार लगाई है। पीड़ित का विडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही चर्चा तेज हो गई।
बताते चलें कि पटखौली पूरेआजम गांव निवासी अकबर काजमी की जमीन का मामला आजमगढ़ रोड निवासी मो. फैजान से चल रहा था। जिसमें एक पक्ष से फैजान ने जमीन के कुछ हिस्से का बैनामा करा लिया। दोनों पक्षों के बीच मामला दीवानी न्यायालय से लेकर चकबंदी न्यायालय में विचाराधीन है। इसी दौरान वर्ष 2025 में फैजान से नीलम सिंह पत्नी रमेश सिंह विधायक शाहगंज ने एक करोड़ तीस लाख रुपये में खरीदने के लिए रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कराया, जिसके एवज विधायक रमेश सिंह के बैंक खाते से 25 लाख रुपये भी दिए जाने का दावा किया गया। सप्ताह पूर्व उक्त जमीन पर दो दर्जन से ज्यादा लोगों ने जेसीबी, ट्रैक्टर लेकर पहुंचे और कब्जा किया। विरोध करने पर मारपीट के दौरान पहुंची पुलिस ने ने दोनों पक्षों के सात लोगों को शांतिभंग में पाबंद करते हुए देर शाम चालान भेजा। लकिन पुलिस ने जेसीबी, ट्रैक्टर और भीड़ को हटाना उचित नहीं समझा और जमीन पर कब्जा हो गया।
पीड़ित परिवार सप्ताह से अधिकारियों की चौखट पर न्याय के लिए परिक्रमा करता रहा, लेकिन उसकी तहरीर पर मुकदमा न लिखकर कोतवाली पुलिस ने अपने उप निरीक्षक की तहरीर पर दोनों पक्षों को आरोपी बनाते हुए मुकदमा दर्ज किया। सूत्रों की माने तो हर जगह से गुहार लगाकर थकने के बाद पीड़ित ने भाजपा के कुछ लोगों की सलाह पर संघ के जिम्मेदारों से मिलने और न्याय मांगने की सलाह पर अमल करते हुए शनिवार की देर शाम मिलने में सफलता हासिल कर ही लिया।
नगर के आजमगढ़ रोड स्थित होटल शाहगंज पैलेस पर आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बैठक में कुछ भाजपा के किसी नेता की सूचना पर पहुंच गया। बैठक समाप्त होने पर पीड़ित खालिद काजमी ने संघ के क्षेत्रीय बौद्धिक प्रमुख मिथिलेश जी के समक्ष हाथ जोड़कर अपनी फरियाद सुनाते हुए विधायक रमेश सिंह से खुद को और परिवार को बचाने की अपील करते हुए न्याय की अपील की। वायरल विडियो में पीड़ित गिड़गड़ाता दिखा और संघ नेता उसे आश्वासन देते हुए सहयोगी से उसकी समस्या जानने का इशारा करते रहे। फिलहाल इस वायरल वीडियो की चर्चा करते लोग दिखाई पड़े। सबसे बड़ा सवाल यह है कि संघ के इस बैठक की सूचना पीड़ित को कैसे पहुंची जब कि पीड़ित मुस्लिम समुदाय का है संघ से उसका दूर दूर तक कोई संबंध नहीं है, जिसके कारण
बीजेपी कार्यकर्ता और संघ के लोग इस गोपनीय बैठक में कीसी अन्य के पहुंचने पर अपनो की कारस्तानी में उलझे दिखे।

