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Akhand Rashtra News > उत्तर प्रदेश > विधायक रमेश सिंह की लुटिया डुबोने में लगे उनके अपनी ही सरकार के लोग!
उत्तर प्रदेशराज्य

विधायक रमेश सिंह की लुटिया डुबोने में लगे उनके अपनी ही सरकार के लोग!

Omkar Tripathi
Last updated: September 25, 2025 10:39 pm
Omkar Tripathi
6 months ago
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विधायक रमेश सिंह की लुटिया डुबोने में लगे उनके अपनी ही सरकार के लोग!
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जौनपुर। कहते हैं कि राजनीति में सब जायज होता है। अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए राजनीति में हर प्रकार के हथकंडे अपनाए जाते हैं। ऐसा ही कुछ इन दिनों शाहगंज विधानसभा में देखने को मिल रहा है। भाजपा की सहयोगी निषाद पार्टी के टिकट पर विधायक बने रमेश सिंह की एक गलती पकड़ कर उनकी राह में कांटे बिछाने का काम उनके अपने ही लोग कर रहे हैं। 

बताते हैं कि विधानसभा सीट पर भाजपा के कई नेताओं की नजर थी, जिन्होंने टिकट पाने के लिए ऐड़ी-छोटी का जोर भी लगाया था। परंतु अंत में यह सीट निषाद पार्टी की झोली में चली गई थी। और धन बल के सहारे रमेश सिंह टिकट पाने में ही सफल नहीं रहे बल्कि जनता ने रमेश सिंह को विधानसभा भेजा। विधायक रमेश सिंह पर इन दिनों अल्पसंख्यक अकबर काजमी की जमीन जबरन हड़पने का आरोप चल रहा है। सूत्रों की माने तो इस मामले को लेकर उनकी योगी दरबार तक हाजिरी भी हो चुकी है। मामले को तूल देने के पीछे भी भाजपा के उन्हीं नेताओं का हाथ माना जा रहा है, जो अभी भी यहां से निराश नहीं हुए हैं। इसका अंदाजा आप पिछले दिनों शाहगंज में आरएसएस की हुई एक मीटिंग से लगा सकते हैं। यह मीटिंग भाजपा के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी तथा यहां से टिकट के प्रबल दावेदार रहे जायसवाल बंधु के होटल में आयोजित की गई थी। 

आमतौर पर आरएसएस की मीटिंग में बाहरी व्यक्ति तथा मीडिया तक को जाने की इजाजत नहीं होती है, यहां तक की संघ की बैठकें गोपनीय होती हैं,जिसकी भनक तक पाना सबके बस की बात नहीं। परंतु इस मीटिंग में अल्पसंख्यक फरियादी का पहुंचकर विधायक पर अपनी जमीन जबरन हड़पने का आरोप लगाना और न्याय की मांग करना साबित करता है कि रमेश सिंह की लुटिया डुबोने में उनके अपने ही लोग शामिल हैं। फरियादी का वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें उसने खुले तौर पर दावा किया कि मेरे प्रकरण को जानने वाले भाजपा के कुछ लोग मेरे मददगार बने हैं। सत्य और असत्य का भेद रखने वाले मुझे न्याय दिलाने के लिए सहयोग कर रहे हैं।

 वहीं भाजपा के कुछ नेता पीड़ित अकबर काजमी को मीटिंग में आने का न्योता प्रदीप जायसवाल द्वारा देने की बात दबी जुबान कह रहे हैं, क्यों कि प्रदीप जायसवाल को इस वक्त हर तरह से रमेश सिंह सबसे बड़े प्रतिद्वंदी दिखाई दे रहे हैं, प्रदीप जायसवाल के कुछ खाश लोगों द्वारा कई बार ऐसा भी कहते सुना गया है, कि नगरपालिका का चुनाव हराने में रमेश सिंह का बहुत बड़ा हाथ था, और अब रमेश सिंह शाहगंज में जमीन कारोबार और कब्जा जैसे कार्य में भी जुड़ रहे हैं जो कि जायसवाल बंधु का पुराना कारोबार है, शाहगंज से लेकर खेतासराय तक जायसवाल परिवार पर विवादित जमीन खरीदने और सत्ता शासन और धन के बलबूते तहसील स्तर और स्थानीय के सहयोग का पूरा फायदा ले कर जबरन जमीन कब्जाने का कई आरोप पूर्व में लग चुके हैं और मुकदमे भी दर्ज हुए हैं, हालांकि ज्यादातर मुकदमों में नाम निकल गए हैं। खैर सच क्या है यह तो एक न एक दिन सामने आ ही जाएगा।

फिलहाल जमीन के काफी बड़े कारोबारी महाराष्ट्र प्रदेश में बड़े बिल्डरों में शुमार, शाहगंज विधानसभा का प्रतिनिधित्व करने वाले रमेश सिंह किस मजबूरी अथवा लोभ के तहत न्यायालय में विचाराधीन चल रहे मामले के बावजूद जमीन का एग्रीमेंट पत्नी नीलम सिंह के नाम कराया। 14 सितंबर को जमीन पर हो रहे कब्जे के दौरान मारपीट के समय पहुंचीं पुलिस ने दोनों पक्षों के सात लोगों को हिरासत में लिया, लेकिन दो दर्जन से अधिक लोगों को मौके से क्यों नहीं हटाया? ट्रैक्टर, जेसीबी को किसके दबाव के चलते कब्जे में नही लिया गया? सवाल बहुत हैं, जिसका जवाब आम जनता भी जानने को बेताब है।

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