तेहरान/वाशिंगटन (अखंड राष्ट्र न्यूज़): अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा भीषण युद्ध अब अपने सबसे निर्णायक और खतरनाक दौर में पहुंच गया है। शुक्रवार (3 मार्च) को इस महायुद्ध का 35वां दिन है, लेकिन शांति की कोई किरण नजर नहीं आ रही है। इस बीच, ईरान के पूर्व विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ (Javad Zarif) ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने पूरी दुनिया के कूटनीतिज्ञों का ध्यान खींच लिया है। ज़रीफ़ ने तेहरान को सलाह दी है कि वह डोनाल्ड ट्रंप की ‘ईंट का जवाब पत्थर से’ देने के बजाय ‘दिमाग’ से काम ले।
‘जीत का ऐलान करो और समझौता कर लो’
जवाद ज़रीफ़ ने ईरान सरकार को मशवरा देते हुए कहा कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप युद्ध रोकने में नाकाम रहे हैं, तो पहल ईरान को करनी चाहिए। ज़रीफ़ के मुताबिक, “ईरान को अपनी जीत की घोषणा कर देनी चाहिए और तुरंत सीजफायर (Ceasefire) का ऐलान करना चाहिए।” उन्होंने सुझाव दिया कि ईरान को अमेरिका के साथ एक ऐसी ‘ग्रैंड डील’ करनी चाहिए जिससे न केवल वर्तमान युद्ध रुके, बल्कि भविष्य के लिए भी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
हॉर्मुज की घेराबंदी और प्रतिबंधों का खेल
युद्ध की वजह से ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) को पूरी तरह बंद कर रखा है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति ठप है। ज़रीफ़ ने सलाह दी है कि तेहरान को हॉर्मुज खोलने का ‘ऑफर’ टेबल पर रखना चाहिए। इसके बदले में अमेरिका से ईरान पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंधों (Sanctions) को पूरी तरह हटवाने की शर्त रखनी चाहिए। ज़रीफ़ का मानना है कि ट्रंप एक ‘बिजनेसमैन’ हैं और वे इस तरह की डील के लिए तैयार हो सकते हैं।
ट्रंप का ‘ग्राउंड ऑपरेशन’ और यूरेनियम की तलाश
दूसरी तरफ, वॉशिंगटन पोस्ट की एक सनसनीखेज रिपोर्ट ने हड़कंप मचा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप अब सिर्फ एयरस्ट्राइक तक सीमित नहीं रहना चाहते। वे ईरान की धरती पर ‘ग्राउंड ऑपरेशन’ की तैयारी कर रहे हैं। इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य ईरान के जमीन के नीचे छिपे यूरेनियम के भंडार पर कब्जा करना है।
ट्रंप ने सैन्य अधिकारियों से इसका पूरा खाका मांगा था, जो अब पेश कर दिया गया है। इस मिशन के लिए हजारों कमांडो की जरूरत होगी। चुनौती सिर्फ लड़ना नहीं, बल्कि ईरान के भीतर एयरस्ट्रिप बनाना और भारी मशीनों को वहां तक पहुंचाना है ताकि यूरेनियम निकाला जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका जमीन पर उतरा, तो यह ऑपरेशन हफ्तों तक चल सकता है और भीषण रक्तपात की वजह बनेगा।
जंग के 35वें दिन क्या है स्थिति?
28 फरवरी को शुरू हुए इस संघर्ष के बाद से मिडिल ईस्ट की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। एक तरफ ट्रंप अपनी सेना को जमीन पर उतारने का मन बना चुके हैं, तो दूसरी तरफ ईरान के भीतर से ही अब समझौते की आवाजें उठने लगी हैं। हालांकि, अयातुल्ला खामेनेई की हत्या के बाद ईरान का कट्टरपंथी नेतृत्व फिलहाल झुकने के मूड में नहीं दिख रहा है।
दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या ईरान जवाद ज़रीफ़ की ‘जीत घोषित करने’ वाली सलाह पर अमल करेगा या फिर ट्रंप के कमांडो तेहरान की धरती पर कदम रखेंगे।
