पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना से पहले Supreme Court का एक बड़ा फैसला सामने आया है। अदालत ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की याचिका को खारिज करते हुए चुनाव आयोग के मतगणना संबंधी फैसले पर मुहर लगा दी है। इस घटनाक्रम के बाद भाजपा ने टीएमसी पर तीखा हमला बोला है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता नलिन कोहली ने टीएमसी की कानूनी कार्यप्रणाली पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पार्टी को हर बार कानूनी रास्ता अपनाने की आदत हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या दिया फैसला?
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस जोयमाल्या बागची की विशेष बेंच ने शनिवार को इस मामले की सुनवाई की। टीएमसी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग पर मनमानी का आरोप लगाया था, लेकिन Supreme Court ने इसे मानने से इनकार कर दिया।
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आयोग का अधिकार: Supreme Court ने स्पष्ट किया कि मतगणना में कर्मचारियों की नियुक्ति चुनाव आयोग का विशेषाधिकार है और यह पूरी तरह से नियमों के अनुकूल है।
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पारदर्शिता का आश्वासन: अदालत ने कहा कि मतगणना केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे मौजूद रहेंगे और सभी राजनीतिक दलों के एजेंट भी वहां रहेंगे, इसलिए किसी भी प्रकार की आशंका का कोई ठोस आधार नहीं है।
नलिन कोहली का टीएमसी पर कड़ा प्रहार
ANI से बातचीत में भाजपा नेता नलिन कोहली ने तृणमूल कांग्रेस की कार्यप्रणाली की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि टीएमसी रोजाना मुकदमों की राजनीति का सहारा ले रही है।
“सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी ताज़ा याचिका पर सुनवाई से इनकार करना यह साबित करता है कि मौजूदा चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह से वैध है।”
इसके साथ ही, कोहली ने पश्चिम बंगाल में लगभग 93% के भारी मतदान का श्रेय चुनाव आयोग और केंद्रीय सुरक्षा बलों को दिया। उन्होंने कहा कि जिन बूथों पर टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा ईवीएम (EVM) पर टेप लगाकर चुनाव चिह्न को ढकने के चौंकाने वाले मामले सामने आए थे, वहां चुनाव आयोग द्वारा दोबारा मतदान (Repoll) करवाना बिल्कुल सही और अपेक्षित कदम था।
कपिल सिब्बल ने रखा अपना पक्ष
दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टीएमसी के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपना रुख स्पष्ट किया। सिब्बल ने मीडिया में याचिका खारिज होने की खबरों को गलत बताया:
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सर्कुलर का पालन: सिब्बल ने कहा कि हमने सर्कुलर को चुनौती नहीं दी, बल्कि अदालत से इसे सही भावना के साथ लागू करने का आग्रह किया था।
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दोनों कर्मचारियों की मांग: सिब्बल का तर्क था कि मतगणना में केंद्र के साथ-साथ राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी तैनात किया जाना चाहिए।
