मंगलेश्वर त्रिपाठी
जौनपुर। यूपी पुलिस के ‘ऑपरेशन क्लीन’ के दावों के बीच खुटहन थाने की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि खुटहन पुलिस ने 99 मुकदमों वाले एक लाख रुपये के इनामी बदमाश को मुठभेड़ या दबिश में पकड़ने के बजाय ‘सेटिंग’ कर थाने बुलाया और फिर बगल के स्कूल के पास से गिरफ्तारी की कहानी बनाकर जेल भेज दिया।
रविवार को हुई गिरफ्तारी,
ग्रामीणों के मुताबिक आरोपी पर , चोरी,लूट, हत्या का प्रयास रंगदारी समेत 99 संगीन मुकदमे दर्ज हैं और उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। चश्मदीद सूत्र बताते है कि खुटहन पुलिस ने आरोपी को सीधे पकड़ने के बजाय बातचीत कर रविवार को सुबह थाने बुलवाया। औपचारिकता पूरी करने के लिए थाने से कुछ दूरी पर स्थित स्कूल के पास से गिरफ्तारी दिखाकर उसे आज कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया.
एक महीने में मिल सकती है जमानत
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस ने आरोपी को जिन धाराओं में जेल भेजा है, उनमें एक महीने के भीतर जमानत मिलना तय है। इससे इलाके में दहशत है। लोगों को आशंका है कि आरोपी जमानत पर बाहर आकर फिर से अपराध करेगा। सवाल उठ रहा है कि 99 मुकदमे वाले इनामी पर इतनी दरिया दिली क्यों दिखाई गईं कि वह जल्द बाहर आ सके।
थाना प्रभारी की कार्यशैली कठघरे में
ग्रामीणों का आरोप है कि खुटहन थाना प्रभारी की कार्यशैली संदिग्ध है। एक तरफ योगी सरकार जीरो टॉलरेंस की बात करती है,
5 से 6 मुकदमें वाले अपराधियों के पैर में गोली मार कर गिरफ्तार करने वाली पुलिस द्वारा
99 मुकदमे वाले एक लाख के इनामी बदमाश को थाने में बुलाकर ‘फर्जी गिरफ्तारी’ की स्क्रिप्ट लिखी जा रही है। लोग पूछ रहे हैं — क्या यही है अपराधियों पर नकेल? अगर 99 मुकदमे वाले को भी थाने बुलाकर सम्मान से जेल भेजा जाएगा तो अपराध कैसे रुकेगा?
पुलिस पर पहले भी लगते रहे हैं आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि खुटहन थाने में यह कोई पहला मामला नहीं है। पहले भी कई इनामी बदमाशों की गिरफ्तारी को लेकर इसी तरह के आरोप लगते रहे हैं। ‘मुठभेड़’ की जगह ‘मैनेज गिरफ्तारी’ का पैटर्न अब आम हो गया है।
बड़े अफसर लें संज्ञान
जनता मांग कर रही है कि इनाम घोषित करने वाले पुलिस अधीक्षक जौनपुर और डीआईजी रेंज एडीजी जोन
इस पूरे मामले की जांच कराएं। सवाल ये भी है —
1. इनामी बदमाश को थाने क्यों बुलाया गया?
2. स्कूल के पास गिरफ्तारी की कहानी क्यों गढ़ी गई?
3. 99 संगीन मुकदमों के बाद भी इतनी हल्की कार्यवाही क्यों नहीँ की गई ?
4. क्या थाना प्रभारी की भूमिका की जांच होगी?
जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक खुटहन पुलिस की कार्रवाई पर ‘सेटिंग’ का दाग लगा रहेगा। अपराध रोकने का दावा करने वाली पुलिस अगर इनामी बदमाशों से ही समझौता करेगी तो आम आदमी न्याय की उम्मीद किससे करे?
पुलिस का पक्ष
इस मामले में खुटहन पुलिस का आधिकारिक बयान अभी सामने नहीं आया है। थाना प्रभारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन जवाब नहीं मिला।
