Uttar Pradesh के ग्रामीण विकास और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर Uttar Pradesh शासन ने एक बेहद ऐतिहासिक और चौंकाने वाला फैसला लिया है। Uttar Pradesh की सभी ग्राम पंचायतों के प्रधानों का कार्यकाल आज, 26 मई 2026 को आधिकारिक रूप से समाप्त हो रहा था। लेकिन नियत समय पर चुनाव न हो पाने की वजह से असमंजस की स्थिति बनी हुई थी, जिस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुहर लगाते हुए विराम लगा दिया है।
सरकार ने नीतिगत बदलाव करते हुए ग्राम प्रधानों का कार्यकाल अगले 6 महीनों के लिए बढ़ा दिया है। इसके साथ ही अब Uttar Pradesh के सभी मौजूदा ग्राम प्रधान ही अपनी-अपनी पंचायतों में ‘प्रशासक’ (Administrator) के तौर पर काम करेंगे। यूपी के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है जब कार्यकाल खत्म होने के बाद अफसरों की जगह जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को ही दोबारा कमान सौंपी जा रही है।
क्यों बदला गया सालों पुराना नियम?
Uttar Pradesh में अब तक की प्रशासनिक परंपरा रही है कि जब भी पंचायत चुनाव समय पर नहीं होते थे, तब सरकार विकास खंड स्तर के एडीओ पंचायत (ADO Panchayat) को गांवों का प्रशासक नियुक्त कर देती थी। हालांकि, इस बार सरकार ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड के मॉडलों का अध्ययन करने के बाद इस व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया:
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योजनाओं की रफ्तार न हो धीमी: गांवों में केंद्र और राज्य सरकार की कई बड़ी योजनाएं (जैसे जल जीवन मिशन, पीएम आवास और मनरेगा) गति पकड़ चुकी हैं। अफसरों के हाथ में कमान जाने से कागजी कार्यवाही और फाइलों के चक्कर में विकास कार्य रुक जाते हैं, इसी को ध्यान में रखकर प्रधानों को ही जिम्मेदारी दी गई।
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प्रधान संघ की मांग हुई पूरी: राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संघ लंबे समय से मांग कर रहा था कि गांवों के प्रधानों को ही चुनाव होने तक कार्यवाहक या प्रशासक बनाया जाए, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया। इस फैसले से यूपी के 27 हजार 694 ग्राम प्रधानों की कुर्सी सुरक्षित हो गई है।
अब कब होंगे चुनाव? 2027 विधानसभा चुनाव के बाद ही संभावना
प्रशासनिक सूत्रों और इस फैसले के टाइमलाइन से यह पूरी तरह साफ हो चुका है कि Uttar Pradesh में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अब वर्ष 2027 के Uttar Pradesh विधानसभा चुनाव के बाद ही कराए जा सकेंगे। इस तरह वर्तमान व्यवस्था में करीब एक साल की देरी होना तय है।
देरी की मुख्य वजहें: हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत पंचायत मतदाता सूची (Voter List) को पूरी तरह से नए सिरे से री-वेरिफाई और अपडेट किया जा रहा है। इसके साथ ही, पंचायतों में सीटों के नए सिरे से आरक्षण (Reservation) निर्धारण की प्रक्रिया भी अभी बाकी है, जिसमें समय लगना लाजमी है।
नवंबर 2026 में आएगी OBC आरक्षण आयोग की रिपोर्ट
पंचायतों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की सीटों का सही और पारदर्शी कोटा तय करने के लिए राज्य सरकार ने पिछले दिनों एक विशेष पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया है:
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कमिटी की रूपरेखा: इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस राम अवतार सिंह की अध्यक्षता में गठित इस आयोग में दो रिटायर्ड आईएएस अधिकारी और दो रिटायर्ड जिला जजों को शामिल किया गया है।
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6 महीने का समय: इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा 4 फरवरी 2025 को दिए गए निर्देश के क्रम में गठित यह आयोग पूरे प्रदेश का डेटा जुटा रहा है। आयोग को नवंबर 2026 तक अपनी फाइनल रिपोर्ट शासन को सौंपनी है। इस रिपोर्ट के आने और कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही यूपी में पंचायतों की सीटों का फाइनल आरक्षण लागू होगा और चुनाव की तारीखें तय की जाएंगी।
