पूर्व ब्लॉक प्रमुख ने रची साजिश बेटे द्वारा जिलाधिकारी से करवाई शिकायत।
जौनपुर | बीते बुधवार को जौनपुर जिले के शाहगंज विधानसभा क्षेत्र के सुइथा कलां ब्लॉक में एक ओर जहां कन्या पूजन का आयोजन हो रहा था, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक साजिशों का ग्राफ तेजी से उभरता नजर आया। 1 अक्टूबर को आयोजित इस कार्यक्रम में शाहगंज विधायक रमेश सिंह, ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि डॉ. उमेश चंद तिवारी, जिलाधिकारी डॉ दिनेश चंद्र सहित भाजपा जिला अध्यक्ष पुष्पराज सिंह एवं क्षेत्र के सम्मानित व्यक्तियों के साथ भाजपा पदाधिकारियों कार्यकर्ताओ की उपस्थिति रही। कन्या पूजन के साथ-साथ बालिकाओं को भेंट भी वितरित किया गया, जो सामाजिक सद्भाव का प्रतीक बनी। तो दूसरी तरफ कार्यक्रम के दौरान ब्लॉक प्रमुख के विरुद्ध एक राजनैतिक षडयंत्र का ढांचा पूर्व से तैयार किया जा चुका था जिसके पीछे पूर्व ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि राकेश वर्मा, जो भाजपा के जिला उपाध्यक्ष भी हैं, ने जानबूझकर अपने बेटे को भेजा। बेटे ने डीएम डॉ दिनेश चंद्र के समक्ष अपने शिकायत में आरोप लगाया गया कि वर्तमान ब्लॉक प्रमुख जाति विशेष के पक्ष में कार्य कर रही हैं। जब कि क्षेत्र पंचायत के कामों की सूची यह दर्शाता है कि आरोप असत्य और बे बुनियाद है,लगभग 46 कार्यों में से क्षत्रिय समुदाय को 9 और ब्राह्मण समाज के लोगों को मात्र 7 काम दिए गए हैं, जबकि शेष 30 को अन्य समुदायों में वितरित किया गया है। इससे साफ पता चलता है कि यह शिकायत ब्लॉक प्रमुख की छवि धूमिल करने की महज साजिश है।
सूत्रों की माने तो इस साजिश के पीछे ब्लॉक प्रमुख के स्वजातीय लोगों की ही संलिप्तता है,जिनको विधायक रमेश सिंह का मौन समर्थन प्राप्त है । क्यों कि प्रमुख प्रतिनिधि डॉ उमेश तिवारी की बढ़ती लोकप्रियता और उच्च स्तरीय नेताओ के साथ अच्छे संबंध के कारण विधायक रमेश सिंह के आगामी राजनीतिक करियर पर खतरा मंडरा रहा है। यह जानकारी भाजपा के आंतरिक स्रोतों से प्राप्त हुई है, यदि सूत्रों की बात में सत्यता है तो एक बात स्पष्ट हो जाती है कि बीजेपी में भीतरी खींचतान चरम पर है। भाजपा के पूर्व प्रमुख की ओर से यह कदम पूर्व नियोजित था,जिससे भाजपा की वर्तमान प्रमुख की साख को नुकसान पहुंचाया जा सके। दूसरी तरफ वर्तमान ब्लॉक प्रमुख या उनके प्रतिनिधि के तरफ से इस मामले पर कोई विशेष टिप्पणी नहीं की गई। उनका यह रुख उनके मजबूत नेतृत्व को दर्शाता है,कि गंदी राजनीति से अछूते रहने के पक्षधर हैं। क्षेत्रवासी इस घटना से स्तब्ध हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि बीजेपी नेतृत्व मामले की निष्पक्ष जांच करेगा। क्या यह जातिगत राजनीति का नया रूप है या आंतरिक कलह? इसका जवाब तो समय ही देगा। फिलहाल, सुइथां कलां ब्लॉक में राजनीतिक तापमान तेज हो चुका है।

